गरीबों को अनाज का सहारा
सीटू तिवारी पटना से
बिहार की राजधानी पटना में चाय का ठेला लगाने वाले 70 साल के महिन्द्र राम से जब जन वितरण प्रणाली (पीडीएस) की बात की तो उनकी आंखों में चमक सी आ गई. जन वितरण प्रणाली मतलब राशन की दुकान जहां से सस्ते दामों में अनाज गरीबों को दिया जाता है। 13 सदस्यों वाले उनके परिवार को हर महीने पीडीएस के जरिए 39 किलो चावल और 26 किलो गेहूं मिलता है। कई बार राशन मिलने में देर भी हो जाती है और अनाज बाजार से खरीदना पड़ता है लेकिन महिन्द्र राम फिर भी खुश हैं। अपना राशन कार्ड दिखाते हुए महिन्द्र राम कहते हैं, ह्लबहुत सहारा रहता है इस अनाज का। वरना परिवार की आमदनी इतनी कहां कि पेट भर खाया जा सके। महिन्द्र राम को ए इत्मीनान बस यूं ही नहीं आया है। कई सर्वेक्षणों की रिपोर्ट है कि एक दशक पहले जहां बिहार में पीडीएस के 90 फीसदी अनाज की चोरी होती थी, अब ए घटकर 20 फीसदी तक रह गई है। 
प्रसिद्ध अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज ने इस विषय पर कई राज्यों के काम काम को करीब से देखा है और खाद्य सुरक्षा कानून की वकालत करते हैं। वे कहते हैं, छत्तीसगढ़ सहित दूसरे राज्यों की तरह बिहार में अब पीडीएस दुकानों पर अनाज उपलब्धता राजनीतिक एजेंडा बनना शुरू हो गया है. जिसके चलते भी यहाँ हालात में सुधार आया है। बिहार सरकार ने फरवरी, 2014 में खाद्य सुरक्षा कानून लागू किया था, जिसके तहत सामाजिक आर्थिक और जातिगत जनगणना के आधार पर नई सूची तैयार की गई। 1986 से पटना में पीडीएस की दुकान चला रहे लक्ष्मी प्रसाद कहते हैं, अनाज अब पहले से ज्यादा नियमित तरीके से आने लगा है। लेकिन जब देर से आता है तो लोगों का बहुत दबाव झेलना पड़ता है। दिसंबर 2014 में बिहार के चार जिलों बांका, गया, पूर्णिया और सीतामढ़ी के 1,000 परिवारों में किए गए खाद्य सुरक्षा सर्वेक्षण 2014 के मुताबिक 16 फीसदी परिवारों के पास राशन कार्ड नहीं था। 76 फीसदी परिवारों ने अनाज में चोरी कम होने की बात स्वीकार की और 91 फीसदी ने कहा कि अनाज की गुणवत्ता सुधरी है। हालांकि रिपोर्ट यह भी कहती है कि अनाज का वितरण बहुत अनियमित है और कई मामलों में राशन डीलर लोगों को निर्धारित दर से ज्यादा पैसे पर अनाज देते हैं।
पीडीएस सिस्टम में सुधार के बावजूद अनाज की उपलब्धता को लेकर केन्द्र और राज्य के बीच बढ़ती खींचतान ने खाद्य सुरक्षा से जुड़े सामाजिक कार्यकतार्ओं की चिंता बढ़ा दी है। राइट टू फूड (भोजन का अधिकार) कैम्पेन के बिहार संयोजक रूपेश कहते हैं, राज्य और केन्द्र के बीच अगर इसी तरह राजनीति चलती रही तो ये बिहार में हो रहे सुधारों पर असर डालेगी। फिलहाल बिहार इस मोर्चे पर अच्छा काम कर रहा है और यह अच्छा काम चलता रहे इसके लिए केन्द्र के सहयोग की जरूरत है। , बीबीसी हिन्दी से
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