सरकारों को हिलाने का दम अब अब किसके पास!!! यहां है!!
दिलीप सी मंडल
अब देश में 600 से ज्यादा न्यूज चैनल, सवा लाख से ज्यादा पत्र-पत्रिकाएं और और दसियों लाख वेबसाइट और यूट्यूब चैनल हैं. यहां किसने क्या लिखा-बोला का ज्यादा मतलब नहीं होता. यहां बहुत शोर है. टुच्चों का दौर है.
असरदार होना अब आसान नहीं है. आपकी सबसे शानदार खबर दो घंटे बाद बर्फ सी ठंडी हो चुकी होती है.
किसी बड़े पत्रकार जितना असर तो सोशल मीडिया का एक बच्चा भी पैदा कर लेता है. एक शानदार पोस्टर बना कर या एक वीडियो डालकर या एक स्लोगन लिखकर.
सरकारों को हिलाने का दम अब सोशल मीडिया के पास आ चुका है. टीवी और अखबार अपनी ये भूमिका खो चुके हैं. वे अब बस हैं. पड़े हैं विमर्श के कोने में. हालांकि सोशल मीडिया पर भी कंट्रोल लग चुका है.
कोई भी पत्रकार अपनी पूरी जिंदगी में आम तौर पर एक ही बड़ा काम कर पाता है. पुण्य प्रसून ने गरीबों की आमदनी दोगुनी होने के नरेंद्र मोदी के झूठ का उसी महिला से पर्दाफाश करवा के वो काम कर लिया है. ज्यादातर पत्रकार अपने जीवन में ऐसा एक काम किए बगैर मर जाते है.
प्रसून वो खबर इसलिए पढ़ पाए क्योंकि संपादक ने वो खबर करवाई और मालिक ने करने दी.
प्रसून अब कुछ न भी करें तो चलेगा.
(दिलीप सी मंडल के फेसबुक timeline से साभार)
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