महाकुंभ में साकार है भारत
महाकुंभ में साकार है भारत।
दिलीप मंडल
महाकुंभ इतना विशाल है कि इसके अंदर कई सारे अरबाईन, हज ओर वैटिकन के क्रिसमस मास वग़ैरह समा जाएँगे। फिर भी जगह बचेगी।
महाकुंभ दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक उत्सव है। किसी भी क़िस्म का दुनिया का सबसे बड़ा जनसमुद्र।
इस साल महाकुंभ में जितने लोग आ रहे हैं वह अमेरिका की कुल आबादी से अधिक है। इतने लोगों से दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा देश बस जाएगा। इस बार 40 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है। ये वह मौक़ा है जब जातियों का ऊपरी भेद मिट जाता है। विभिन्न जातियों के महामंडलेश्वरों की अगुवाई में स्नान होगा। शुद्धतावाद का यहाँ कोई अवकाश नहीं है। एक ही जल में सब नहाएँगे, सामूहिक भोजन करेंगे, धर्म चर्चा करेंगे। कोई बुलावा भी नहीं। बीस रुपए का पंचांग ही करोड़ों लोगों का राष्ट्रीय निमंत्रण पत्र है। भारत का सांस्कृतिक नक़्शा मन में बनाना हो तो आँख बंद करके सोचिए कि दुनिया में कहाँ सघन रूप से महाकुंभ, पोंगल, बिहू और लोहड़ी आदि मनाते हैं, जहां से तथागत गौतम बुद्ध का संदेश सारी दुनिया में फैला।
वही पुण्यभूमि और पितृभूमि भारत है।
दिलीप मंडल के फेसबुक पेज से साभार
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