चमकी बुखार पर यह कैसी रिपोर्टिंग!!
Vineet Kumar
एक चैनल का मीडियाकर्मी जब दूसरे चैनल के मीडियाकर्मी से ज्यादा संवेदनशील दिखने की होड़ में लग जाए तो वो एक अश्लील खेल में बदल जाता है.
TV9 के अजीत अंजुम ने जब मुजफ्फरपुर के अस्पताल के आईसीयू से रिपोर्टिंग की तो मैंने आपत्ति जतायी. कुछ लोगों को ये बात पसंद नहीं आयी. मैं इस आपत्ति पर अभी भी कायम हूं.
अब देख रहा हूं कि हर दूसरा चैनल वार्ड से ही पीटीसी और रिपोर्टिंग कर रहा है. रिपोर्टर/स्टार एंकर चीख रहे है. न तो मरीज की, न ही उनके परिजन की निजता, शांति और आईसीयू के नियमों की परवाह है और न ही मीडिया की बुनियादी शर्तों की.
पहले आप कह भी सकते थे कि ये सब वो इसलिए कर रहे हैं कि आवाज सरकार और प्रशासन के कानों तक जाए लेकिन नहीं.
अब उनकी निर्लज्जता और बदतमीजी साफ झलक जा रही है. उन पर जैसे एक सनक सवार है. लग ही नहीं रहा कि वो गंभीर बीमारी से ग्रस्त बच्चों और बिलखते परिजनों के बीच हैं. उनके लिए आईसीयू जैसे स्टूडियो हो और ये सारे क्रोमा.
यकीं मानिए, कुछ लोगों को छोड़ दें तो टीवी मीडियाकर्मियों की संवेदना मर चुकी है. वो इतने चीखने-चिल्लाने के अभ्यस्त हो चले हैं कि उन्हें इतनी समझ भी नहीं रही कि कहां शांत ढंग से विजुअल्स लेकर बाहर आकर पीटीसी कर लें. आईसीयू उनके लिए वो सेटअप हो गया है जिसे बनाने में उन्हें लाखों रूपये लगते. यहां भी खर्चे में कटौती, यहां भी सबसे आगे धंधा.
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