नितिन गडकरी का इन्नोवेटिव पोलटिक्स
संजय तिवारी
गडकरी बहुत इन्नोवेटिव पोलिटिशयन हैं। कई बार गड़करी का इन्नोवेशन देखकर लगता है कि हमारे पोलिटिशियन (खासकर सेकुलर पोलिटिशियन) मानसिक रूप से कितने दरिद्र होते हैं। इस आदमी ने देश को हाइवे पर चलना सिखाया और आज भारत में कुल सड़क का दो प्रतिशत नेशनल हाइवे है। चार लेन और छह लेन की सड़के अब हर राज्य में पहुंच चुकी है। आज हमारे यहां नेशनल हाइवे उसी तकनीकि पर बन रहे हैं जिस पर यूरोप और अमेरिका में बनते हैं। अब यह आदमी इथेनॉल और इलेक्ट्रिक इंजन के पीछे पड़ा हुआ है।
कोई तीन चार महीना पहले एक प्रोग्राम में जब उन्होंने ये बात कही थी कि मैं देश में पांच साल के अंदर डीजल पेट्रोल का आयात बंद कर दूंगा तब मुझे भी यकीन नहीं हुआ था कि जिस देश की पूरी अर्थव्यवस्था ही पेट्रोल डीजल और कोयले पर चलती हो उस देश में इतनी जल्दी इतना बड़ा काम कैसे हो सकता है?
लेकिन गड़करी है तो गड़करी। डीजल पेट्रोल के विकल्प के रूप में वो एथेनॉल और इलेक्ट्रिक वेहिकल को बढ़ावा देने में जुट गये हैं। सरकार ने एकमुश्त दस हजार इलेक्ट्रिक कार खरीदने का फैसला किया है जो टाटा और महिन्द्रा मिलकर सप्लाई करेंगे। इसके अलावा मारुति और ह्यून्दे इलेक्ट्रिक कार लाने की तैयारी शुरु कर चुके हैं। अब गड़करी सार्वजनिक परिवहन की बसों को इलेक्ट्रिक इंजन से चलाने की एक बड़ी योजना पर काम कर रहे हैं। वो राज्यों से कह रहे हैं कि कम से कम सार्वजनिक परिवहन निगम की सिटी बसों को इलेक्ट्रिक इंजन पर चलाया जा सकता है। सलाह लेनेवालों में केजरीवाल भी हैं जो दिल्ली में पाल्यूशन सेस का पैसा डकार कर बैठे हैं।
हालांकि केजरीवाल का ट्रैक रिकार्ड बहुत खराब है। वो काम न करनेवाले आदमी है। वही सेकुलर सोच का लोचा। लेकिन दूसरे राज्य उत्सुक हैं। महाराष्ट्र में बंबई और नागपुर में इलेक्ट्रिक बसें चलनी शुरु हो गयी हैं। यूपी और बिहार ने भी रुचि दिखाई हैं। गडकरी ने आज एथेनॉल से चलनेवाला आटोरिक्शा बिहार में लांच भी कर दिया। अगर सड़क पर आटो, मोटरसाइकिल, कार, बस ये सब एथेनॉल या इलेक्ट्रिक इंजन पर चलेंगे तो प्रदूषण ही छूमंतर नहीं होगा, कैंसर और दमे की घातक बीमारी से भी बहुत हद तक बचाव हो सकेगा।
अब इस बात पर बहस हो सकती है कि क्या हमारे खेत खाने का अनाज पैदा करें या फिर गाड़ी का पेट्रोल। लेकिन इस बात पर तो कोई बहस नहीं हो सकती न कि अगर आधी सफलता भी मिली तो तीन लाख करोड़ से ज्यादा पैसा जो अभी सऊदी अरब और ईरान जाता है वह हमारे किसान के पास जाएगा। हमारी उर्जा का स्रोत खाड़ी के देश नहीं बल्कि हमारी अपनी जमीन और आसमान बन जाएगा। रोजगार के करोड़ों नये अवसर विकसित होंगे। अगर हमने ठीक से इन योजनाओं को लागू किया तो भारत दुनिया में वैकल्पिक उर्जा का नया राजदूत भी हो सकता है। इसलिए मैं तो गड़करी जी के इन प्रयासों का स्वागत, समर्थन और धन्यवाद कर रहा हूं कि वो भारत को भविष्य की राह दिखा रहे हैं। आपकी आप जानें।
(संजय तिवारी विस्फोट डॉट कॉम के संपादक है. आलेख उनके फेसबुक पेज से साभार)
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