एकड़ एक , आमदनी तीन : अंतर हरियाणा और मध्य बिहार का – कौशल किशोर
कितनी कहानियाँ होती हैं , आस पास बिखरी हुई ,समेटे जाने का बाट जोहती हुई .
मैं आधिकारिक तौर पर एक प्रशासनिक कार्य में विगत ढाई साल से लगा था . आज वह प्रक्रिया अनौपचारिक रूप में पूरी हो गई और अंतिम कड़ी के तौर पर अब महज़ औपचारिक आदेश पारित करना है . मेरे एक हरियाणवी सहयोगी , इस पूरे प्रकरण में साथ रहे . आज कुछ फ़ुर्सत मिला तो उनसे व्यक्तिगत से लेकर विभागीय तक , ढेर सारे मुद्दों पर बात चीत हुई .
फ़ुर्सत के इस गुफ़्तगू का एक ख़ास हासिल रहा हरियाणा की कृषि अर्थव्यवस्था की समझ .हरियाणा में रकबे की मुख्य इकाई है क़िला , जो तक़रीबन एक एकड़ के समतुल्य है . सोनीपत -पानीपत में नहर से सिंचित कृषि योग्य एक एकड़ ज़मीन , पैंतीस हज़ार में साल भर के लिए पट्टे पर उपलब्ध हो जाती है . ज़मीन मालिक की यह विशुद्ध आय है . जो किसान खेत पट्टे पर लेता है वो कम से कम उस खेत में दो फ़सल धान और गेंहू की उपजाता है . एक एकड़ खेत तीस से पैंतीस क्विंटल धान और पचीस से तीस क्विंटल गेंहू की औसत पैदावार देता है . आमतौर पर हरियाणा के इस इलाक़े की खेती को न तो बाढ़ और न ही सिंचाई के अभाव में सूखे का सामना करना पड़ता है . नहर की शृंखला , ट्यूबवेल और ग्रामीण क्षेत्रों में सरकार द्वारा उचित दर पर पर्याप्त बिजली की आपूर्ति , हरियाणा में खेती को एक पेशे के तौर पर निश्चितता प्रदान करती है . सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य पर मंडियों में उपज को ख़रीदती है . लब्बोलुबाव यह की एक एकड़ में धान से 45 से 50 हज़ार और गेंहू से क़रीब चालीस हज़ार रुपए की आमदनी पक्की . किसान अगर उद्दमी हुआ तो धान और गेंहू के साथ कुछ साग सब्ज़ी भी बोनस के तौर पर उपजा लेता है . कुल आमदनी में से पट्टे की पैंतीस हज़ार रुपए की राशि को घटा कर हरियाणवी किसान एक एकड़ से पचास हज़ार रुपए मूल्य का सालाना उत्पादन करता है .
इसके ठीक उलट , मध्य बिहार में एक एकड़ ,दो फ़सल उपजाने योग्य सिंचित खेत का सालाना पट्टा , अधिक से अधिक बारह हज़ार है . मतलब ज़मीन मालिक को एक एकड़ खेत के बदले साल भर में मात्र बारह हज़ार रुपए पट्टे पर खेती करने वाला किसान देता है . ज़ाहिर है मध्य बिहार के बारह हज़ार प्रति एकड़ बनाम हरियाणा के सोनीपत के पैंतीस हज़ार प्रति एकड़ पट्टे का गैप दोनो जगहों की कृषि उत्पादकता के अंतर के कारण है . हरियाणा की खेती मध्य बिहार की खेती से तीन गुना ज़्यादा उत्पादक और आमदनी का धंधा है .
एकड़ एक और आमदनी तीन गुणा अधिक . यह अंतर है बिहार और हरियाणा की खेती का .
Kaushal Kishore के फेसबुक टाइमलाइन से साभार
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