आषाढ़ी पूर्णिमा के दिन भगवान बुद्ध ने दी थी पहली दीक्षा
डा. सुरजीत कुमार सिंह
आज आषाढ़ी पूर्णिमा का दिन है। आज ही के दिन भगवान बुद्ध ने सारनाथ में पंचवर्गीय श्रमणों को बौद्ध धर्म की दीक्षा दी थी। आज ही के दिन से बौद्ध धर्म की व्यवस्थित शुरुआत या आरंभ हुआ था। धम्मचक्र प्रवर्तन सूत्र का उपदेश भगवान बुद्ध ने आज ही के दिन सारनाथ में दिया था। आज से भिक्षुओं का वर्षावास भी आरंभ होता है जो 3 महीने चलता है। भारतीय परंपरा में पर्यावरण संरक्षण की यह एक अनोखी पद्धति है। जिसमें सभी बौद्ध भिक्षु अधिक यात्राएं नहीं करते हैं। अब से ढाई हजार साल पहले भारत में उतनी व्यवस्थित सड़के नहीं थी और ना ही राजमार्ग इतने बेहतरीन थे। यातायात करते समय या पैदल चलते समय, पौधों की नन्हीं नन्हीं कोपलें, जो बारिश में इस समय निकलती है और जिन पौधों के बीजों से अंकुर निकलता है, वह पैरों से कुचल जाया करते थे. इसलिए भगवान बुद्ध ने यह नियम बनाया कि बरसात के मौसम में तीन माह कोई भी भिक्षु यात्राएं नहीं करेगा, बल्कि वह एक जगह स्थित होकर किसी एक बुद्ध विहार में रहकर, अपनी ध्यान साधना करेगा, बुद्ध धम्म और संघ को व्यवस्थित करेगा, वह चित्त की साधना करेगा अपने चित्त को समाहित करेगा और इन महीनों में वह अपना अध्ययन करेगा, अपनी पढ़ाई करेगा और वहां आसपास में रहने वाले लोगों को शिक्षित करेगा, जिस क्षेत्र में वह बुद्ध विहार है, उनके लोगों के बीच, उन लोगों में सद्गुणों का प्रसार करेगा, मानव कल्याण, प्राणी कल्याण की भावना को प्रेरित करेगा ! उनकी मंगल की कामना करेगा, उनको एक अच्छा मनुष्य बनने के लिए प्रेरित करेगा, ऐसा भी एक अभिप्राय था, दूसरा पर्यावरण संरक्षण का तो है ही है !
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