इस्लाम अपने कानून के आगे किसी कानून को मानता है क्या?
संजय तिवारी
किसी गैर मुस्लिम लड़की को अगवा करना, उसको इस्लाम कबूल करवाना और फिर उससे निकाह कर लेना ये अल्लाह का काम है। इस नेक काम का पुरस्कार आखिरात में मिलता है। जब आखिरी दिन नबी पूछेंगे कि बताओ तुमने इस्लाम के लिए क्या किया तो उन्हें बताएंगे हूजूर काफिरों की आबादी खत्म करने के लिए हमने हमने एक गैर मुस्लिम से शादी की।
यह वह मूल सिद्धांत हैं जिस पर सच्चा मुसलमान चलता है। पीढ़ी दर पीढ़ी वह काफिरों को खत्म करने की लड़ाई लड़ता है क्योंकि जब तक आखिरात नहीं आती धरती से काफिरों को खत्म करने की जंग जारी रखनी है। इस पवित्र इस्लामी काम के लिए पहले जंग का सहारा लिया जाता था। हाल फिलहाल में इराक में यजीदियों के साथ यह पवित्र इस्लामी व्यवहार किया जा चुका है जब पुरुषों को कत्ल करके उनकी लड़कियों को अगवा किया गया और उनका धर्म बदलने के लिए कहा गया। जब लड़कियों और महिलाओं ने ऐसा करने से मना किया तो उन्हें सेक्स स्लेव बनाकर अपने हरम में डाल दिया गया।
तीन दशक पहले कश्मीर में भी पंडितो को यही धमकी दी गयी थी। तुम्हें कत्ल करेंगे और तुम्हारी औरतों से निकाह। इंशा अल्लाह, इंशा अल्लाह। पंडितों ने इस धमकी के आगे सिर झुका दिया और रातों रात कश्मीर घाटी छोड़कर भाग गये।
ऐसे देश जहां मुसलमानों की आबादी कम है, वहां इस पवित्र काम के लिए प्यार का ढोंग रचाया जाता है और मुस्लिम लड़कों को ट्रेनिंग दी जाती है कि अगर वो किसी गैर मुस्लिम को अपने प्यार में फांसकर शादी करते हैं तो यह इस्लाम की कैसे सबसे बड़ी सेवा होगी। लेकिन जहां आबादी ज्यादा है और ताकत मुसलमानों के हाथ में है वहां इस ढोंग की जरूरत नहीं पड़ती। उन्हें जबरन घर से उठा लिया जाता है। वैसे ही जैसे पाकिस्तान के थारपारकर जिले में इसी 6 जून को सोलह साल की रविता मेघवाल को उठा लिया गया। 37 साल के सैयद नवाज अली शाह और उसके सच्चे मुसलमान साथियों ने रविता को उसके घर से अगवा किया, कलमा पढ़ाकर पाक किया और निकाह कर लिया।
जिस गांव से रविता को अगवा किया गया उस गांव में सिर्फ चार घर हिन्दू परिवार रहते हैं, बाकी मुसलमान परिवार हैं। रविता के पिता ने अपनी बच्ची के अगवा होने की एफआईआर करवा दी है लेकिन सच्चा मुसलमान आखिरकार इस्लाम का ही साथ देगा, इसलिए पुलिस किसी को न तो गिरफ्तार कर रही है और न ही कार्रवाई कर रही है। रविता के पिता सतराम मेघवार कहते हैं उनकी बच्ची नाबालिग है और कानूनन उसकी शादी नहीं हो सकती, लेकिन इस्लाम अपने कानून के आगे किसी कानून को मानता है क्या? (यह आलेख विस्फोट डॉट कॉम के संजय तिवारी के फेसबुक पेज से साभार लिया गया है. )
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