आखिर क्यों खारिज किए गए नीतीष के चहेते अधिकारी
कभी विकास वैभव और शिवदीप लांडे की गिनती बिहार के काबिल पुलिस अधिकारियों में हुआ करती थी। जहां इनकी नियुक्ति होती अपराध दर में खुद बखुद कमी आने लगती। मगर नए निजाम में विकास वैभव को सेंटिंग में डाल दिया गया है और शिवदीप लांडे उपेक्षा से तंग आकर महाराष्ट्र जा रहे हैं।
आखिर ऐसा क्यों हुआ? कभी ये नितीश के चहेते अधिकारी थे आज ये ख़ारिज क्यों कर दिये गये। शिवदीप लांडे ने तो रोहतास में बॉर्डर पार कराने के नाम पर हो रहे भ्रष्टाचार पर विस्तृत रिपोर्ट सरकार को सौंपी थी। क्या उस रिपोर्ट का कुछ हुआ? अगर कोई कार्रवाई होती तो क्या सारण के एसपी पर 20 रुपये के नोट का लायसेंस ट्रक वालों के नाम जारी करने का आरोप लगता? और रोचक तथ्य तो यह है कि खुलासा होने के बावजूद प्रशासनिक अमले में ऐसी चुप्पी रहती?
विकास वैभव तो खैर अलग किस्म के अधिकारी हैं वे अपने खाली वक़्त का इस्तेमाल अपनी क्रिएटिविटी को निखारने में कर रहे हैं। पुरातात्विक मसलों पर उनका बेहतरीन काम है। मुमकिन है बहुत जल्द इस मसले पर उनकी कोई किताब भी आ जाये। मगर सवाल ज्यों का त्यों है। यह सरकार अपने काबिल पुलिस अधिकारीयों को इस तरह उपेक्षित क्यों कर रही है? क्या इसलिए कि ये दोनों अधिकारी लालू जी के दरबार में हाजिरी नहीं लगाते?
साबित कर रहा है कि बिहार मे प्रशासनिक सुधार व विकास कार्य की सफलता मे पूर्व सरकार मे भाजपा का अहम योगदान था ।
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