India

 
 

शॉकर कितना मजबूत है आपके जीवन की गाड़ी का

Pushya Mitra ………………………………………………………… पहले कल्पेश जी की खुदकुशी की सूचना मिली, फिर हजारीबाग में एक व्यवसायी परिवार के छह सदस्यों के एक साथ खुदकुशी की खबर आयी, पहले भी किसी आइएएस, किसी अधिकारी, किसी नेता की खुदकुशी की खबरें हम सुनते-जानते रहे हैं. भैय्यूजी महाराज जैसे आध्यात्मिक गुरु और कलिखो पुल जैसे बड़े राजनेता खुदकुशी कर रहे हैं. किसानों की खुदकुशी का तो कहना ही क्या, वह एक अलग ही मसला है. मगर इन लोगों की खुदकुशी समाज में एक अनकहा डर पैदा करती है, ये किसान नहीं हैं जोRead More


भीड़ बनता भारत

अरुण कुमार त्रिपाठी इक्कीसवीं सदी में भारत भीड़ में बदल रहा है। उसकी नागरिकता अगर राष्ट्रीय स्तर पर बहुसंख्यक धर्म, सेना के प्रति समर्पण, काल्पनिक कथाओं व अफवाहों को सत्य मानने का हठ, निरंतर शत्रुओं की पहचान और उन्हें सबक सिखाने की भावना से परिभाषित हो रही है तो स्थानीय स्तर पर वह `हम और वे’ बीच बंट रही है। भावनाओं के इस घटाटोप ने `हम भारत के लोग’ नामक उस प्रत्यय को बहुत छोटा कर दिया है जिसने अपने आपको एक संविधान दिया और अफवाहों और हिंसा से दूरRead More


अब अदालती फैसले हिंदी में

डॉ. वेदप्रताप वैदिक आजादी के 70 साल बाद भी हमारा देश अंग्रेजी का गुलाम है। किसी भी शक्तिशाली और संपन्न राष्ट्र के अदालतें विदेशी भाषा में काम नहीं करतीं लेकिन भारत की तरह जो पूर्व गुलाम देश हैं, उनके कानून भी विदेशी भाषाओं में बनते हैं और मुकदमों की बहस और फैसले भी विदेशी भाषा में होते हैं। जैसे बांग्लादेश, पाकिस्तान, श्रीलंका, मोरिशस आदि ! भारत की अदालतें यदि अपना सारा काम-काज हिंदी में करें तो उन पर कोई संवैधानिक रोक नहीं है लेकिन जब भारत की संसद ही अपनेRead More


Share
Social Media Auto Publish Powered By : XYZScripts.com