बिहार की राजनीति में कौन है ‘कांग्रेस का विभिषण’

कांग्रेसी विधायकों से राहुल की वन टू वन मीटिंग
बिहार कथा ब्यूरो. नई दिल्ली.
बिहार में कांग्रेस विधायकों को टूट को लेकर अंदरूनी घमासान मचा हुआ है. पार्टी को टूट से बचाए रखने के लिए आलाकमान सक्रिय हो गया है. कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी का बिहार के अपने विधायकों से मुलाकात का सिलसिला दूसरे दिन भी जारी रहा. राहुल ने बुधवार को बिहार के 27 कांग्रेसी विधायकों में से 10 से मुलाकात की थी. इसी कड़ी में बचे हुए विधायकों से गुरुवार को मुलाकात की. बिहार के एक-एक विधायक से राहुल निजी तौर पर मिले  और आपनी बात रखी. राहुल जानना चाहते हैं कि आखिर वो कौन विभीषण है जो पार्टी के विधायकों को नीतीश कुमार के संग जाने के लिए भड़का रहा है. दरअसल पिछले दिनों महागठबंधन से नीतीश कुमार ने नाता तोड़कर बीजेपी से हाथ मिला लिया था और एनडीए की ओर से सत्ता पर काबिज हो गए थे. इसके बाद से ही कांग्रेसी विधायकों में टूट की खबरें आने लगी थीं. बिहार विधानसभा चुनाव 2015 में कांग्रेस के 27 विधायक जीतकर आए थे. इनमें से कम से कम 18 टछअ के नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू के संग जाने की खबरें थीं.
कांग्रेस आलाकमान नीतीश को घेरने से पहले अपने घर को दुरुस्त करने में जुट गया है. इसी के मद्देनजर राहुल ने बिहार के कांग्रेसी विधायकों से मुलाकात का सिलसिला शुरू किया है. उन्होंने बुधवार को 10 विधायकों से मुलाकात की थी और बाकी बचे विधायकों से गुरुवार को मिल रहे हैं. जबकि इसी मुद्दे पर पिछले दिनों कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भी पार्टी प्रदेश अध्यक्ष अशोक चौधरी और विधायक दल के नेता सदानंद सिंह के साथ चर्चा की थी.
आजाद, अग्रवावला और सिंधिया को आए थे बिहार
कांग्रेस सुप्रीमो ने बिहार के कांग्रेसी विधायकों में टूट की आशंका को देखते हुए कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद, जेपी अग्रवाल और ज्योतिरादित्य सिंधिया को अलग-अलग भेजा था. इन तीनों नेताओं की रिपोर्ट के आधार पर ही कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी बिहार के विधायकों के साथ बैठकर उनकी शंकाओं-शिकायतों को दूर करने में लगे हैं. राहुल जानना चाहते हैं कि आखिर वो कौन विभीषण है जो पार्टी के विधायकों को नीतीश जंग जाने के लिए भड़का रहा है.
अशोक चौधरी का यह कहना है
कांग्रेस की टूट को लेकर बिहार प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अशोक चौधरी के एआईसीसी के कुछ नेताओं के खिलाफ लगाये आरोपों के बारे में पूछे जाने पर सिंह ने कहा, इसका उार मैं नहीं दे सकता। इसका जवाब वही दे सकते हैं। इससे पहले आज दिन में बिहार कांग्रेस अध्यक्ष अशोक चौधरी ने पटना में आरोप लगाया कि कुछ कांग्रेस नेता यह दुष्प्रचार करके उनके खिलाफ बगावत को हवा दे रहे हैं कि वह प्रदेश में पार्टी तोड़ने का प्रयास कर रहे हैं।
चौधरी ने बताया, बिहार प्रदेश कांग्रेस में संकट के पीछे एआईसीसी के कुछ नेता हैं, जो मेरे खिलाफ यह दुष्प्रचार करके बगावत को हवा दे रहे हैं कि मैं नीतीश कुमार की जदयू के पक्ष में कांग्रेस को तोड़ने की कोशिश कर रहा हूं। मेरे स्थान पर अपनी पसंद के व्यक्ति को बिठाने के लिए विक्षुब्धों को हवा दी जा रही हैं।
नीतीश की अलोचना में आई नरमी
कांग्रेस में बिखराव को लेकर अटकलों को बल महागठबंधन के बिखराव के बाद स्थानीय कांग्रेस नेताओं द्वारा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की आलोचना करने में नरम रवैया बरता जाने के कारण मिल रहा है। साथ ही बिहार में व्यवस्था परिवर्तन होने के बावजूद महागठबंधन सरकार में शामिल रहे राजद के मंत्रियों को बंगला खाली करने का नोटिस तो दिया गया पर कांग्रेस कोटे के मंत्रियों में से अशोक चौधरी और अवधेश कुमार सिंह से सरकारी बंगला खाली नहीं करवाया गया। महागठबंधन से नाता तोडने के बाद भाजपा के साथ बिहार में बनायी गयी राजग की नई सरकार में नीतीश ने आठ मंत्रियों की जगह अभी खाली छोड रखी है। इसके बारे में अटकलें लगायी जा रही हैं कि ये जगह कांग्रेस छोडकर आने वालों के लिए रखी गयी हैं। किन्तु जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने कल कहा था कि उनकी पार्टी अन्य दलों को तोडने की इच्छुक नहीं है।






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