बेटियों के नयनों में सपने सजा रहे गुरु, देश के कोने-कोने में छात्राओं को मिल रही प्रतिष्ठा

वरुणेंद्र कुमार; हिसुआ, नवादा; जमाने के साथ होड़ लेतीं बिहार के नवादा जिले की बेटियों के पीछे खड़े एक गुरु की मेहनत और मार्गदर्शन ने सुदूर कस्बाई इलाकों में शिक्षा की मशाल जला दी है। वे बेटियों के नयनों में सपने सजा रहे हैं, उसे राह दिखा रहे हैं। यही कारण है कि यहां की छात्राएं देश के कोने-कोने में प्रतिष्ठित जगहों पर कार्यरत हैं। यह स्कूल है प्रोजेक्ट फूलचंद साह मुनक्का इंटर विद्यालय हिसुआ और इसका श्रेय यहां के  प्रभारी प्रधानाचार्य मिथिलेश कुमार सिन्हा को जाता है। अभी दो माह पहले ही यहां से उत्तीर्ण सात छात्राओं ने एक साथ विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता प्राप्त की है। ज्योति सीबीआइ तो अनन्या जोशी मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस के लिए चयनित हुईं। शालिनी कोलकाता में स्वास्थ्य विभाग में तो प्रिया भारती आइबी दिल्ली में। लक्खी कुमारी श्रम मंत्रालय दिल्ली तो पूजा कुमारी स्वास्थ्य विभाग में चयनित होकर कानपुर पहुंच गईं। स्नेहा कुमारी का चयन शहरी विकास मंत्रालय के लिए हुआ।
छात्राओं के सिर पर एक पिता का हाथ
एक शिक्षक समाज को कैसे बदल सकता है, इसकी बानगी हैं मिथिलेश सिन्हा। एक शिक्षक के रूप में, एक पिता के रूप में। हमेशा यही सोचते रहना कि कैसे इन सबको बेहतर शिक्षा दी जाए। जरूरत पड़ी तो लोगों के सामने हाथ भी फैला देते हैं-यह कार्यक्रम करना है, कुछ मदद कर दीजिए, और समाज भी उनकी एक आवाज पर उनके साथ खड़ा हो जाता है।
निजी स्कूलों को मात देता सरकारी स्कूल
यह सरकारी स्कूल है, पर अच्छेअच्छे निजी विद्यालयों को मात देता है। आज की तारीख में यहां करीब 1800 छात्राएं नौवीं से 12वीं तक की पढ़ाई कर रही हैं। पढ़ाई के साथ-साथ खेलकूद, गीत-संगीत, हर एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिवटी। यही वजह है कि अभिभावक इस स्कूल में बच्चियों के दाखिले को लालायित रहते हैं।
यूं ही नहीं हुआ यह सब
इन सबके पीछे मिथिलेश सिन्हा की बहुत बड़ी साधना और तपस्या है। खुद भी समर्पित और 22 शिक्षकों की पूरी टीम में भी यही भाव। प्रेरणा, प्रेरणा और प्रेरणा। यही यहां का मूलमंत्र है। पॉलिथीन पर रोक, बाल विवाह और दहेज जैसी कुप्रथाओं के विरुद्ध जागरुकता जैसे कार्यक्रम चलते रहते हैं। पर्वतारोही संतोष यादव और वीरचक्र प्राप्त कर्नल टीपी त्यागी जैसे लोग यहां आ चुके हैं। एक-एक ईंट जोड़कर इस स्कूल को उन्होंने इस मुकाम तक पहुंचाया है। इस कार्य के लिए उन्हें राष्ट्रपति पुरस्कार भी मिला है। मिथिलेश कुमार सिन्हा का कहना है कि इच्छाशक्ति ही सफलता की कुंजी है। हमारे यहां की बेटियां जब सफल होती हैं तो उस खुशी को बयां नहीं कर सकता। इससे शिक्षकों में भी उत्साह का माहौल बनता है। बेटियां पढ़ेंगी और बढ़ेंगी, तभी समाज भी आगे बढ़ेगा। बस, अपना कार्य कर रहा हूं
जागरण से साभार






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