सभ्य समाज का कलंक है दहेज

बिहार कथा न्यूज नेटवर्क
सिवान/जीरादेई ।प्रखण्ड मुख्यालय के महेंद्र उच्च विधालय सह इंटर कालेज के परिसर में बुधवार को सर पंच व् पंचो के प्रशिक्षण में विवाह व् दहेज के चलन पर प्रशिक्षको द्वारा विस्तार से चर्चा हुआ । डी एल टी कृष्ण कुमार सिंह ने बताया की दहेज सभ्य समाज के लिये कलंक है इस प्रथा को तोड़ने में जनप्रतिनिधियों की भूमिका महत्वपूर्ण है ।उन्होंने बताया की हमारे समाज में दहेज समुदाय के हर वर्ग तक पहुँच गया है ।इसका अमीरी गरीबी से कोई ताल मेल नहीं है ,और न ही सम्प्रदाय जाति का भेद भाव है उन्होंने बताया की आज दहेज के रूप में मोटी रकम के साथ साथ कार ,फर्नीचर ,कीमती कपड़े व् भारी गहने भी वधू के परिवार से वर के परिवार को भेजे जाते है । वही प्रखण्ड राज पंचायत पदाधिकारी सूरज कुमार ने दहेज प्रतिषेध अधिनियम ,1961 की कुछ खास बातें को बताते हुए कहा की दहेज का लेन देन दोनों अपराध है इसके लिये कम से कम पांच वर्ष कैद या पंद्रह हजार रूपये जुरमाना किया जा सकता है ।इसके अतिरिक्त दहेज के मांग करने पर भी छः मास सजा व् दस हजार रूपये तक का जुर्माना किया जा सकता है ।उन्होंने बताया की दहेज हत्या के लिये सात साल की सजा दी जा सकती है ।यह अपराध गैरजमंतीय है ।वही प्रशिक्षक सुधीर शर्मा व् भूपेंद्र ओझा ने बताया की दहेज के लेन देन का विरोध कर एवम् दहेज के दुष्प्रभावो के बारे में सामाजिक जागरूकता को बढ़ाकर हम हजारों महिलाओं को उत्पीड़ित होने से बचा जा सकता है ।उन्होंने बताया की दहेज उत्पीड़न की सुचना स्थानीय संरक्षण पदाधिकारी अथवा पुलिस को सूचित कर हम महिलाओं पर होने वाली हिंसा को रोक सकते है । बीडीओ शशि शेखर ने बताया की जिला स्तर पर संचालित महिला हेल्प लाइन ,पंचायत के मुखिया,सरपंच ,स्वयं सहायता समूह की बहनों ,पारा लीगल कार्य कर्ताओ ,आंगनबाड़ी केन्द्रों ,प्राथमिक स्वाथ्य केन्द्रों से भी मदद ली जा सकती है ।इसमें घरेलू हिंसा के रोक थाम पर चर्चा किया गया.
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