बिहार चुनावों के बाद  चाणक्यों की मांग

chankyaनई दिल्ली। बिहार में नीतीश कुमार की जीत में प्रशांत किशोर की अहम भूमिका सामने आने के बाद अब संचार और जनसंपर्क के लोग राजनीति में भी जमीन तलाश रहे हैं जो अब तक कारोबार की दुनिया की ओर ही नजर लगाए रहते थे। कई पीआर एजेंसियां राजनीति के क्षेत्र में किस्मत आजमाने पर विचार कर रहीं हैं, वहीं कई संचार विशेषज्ञ राजनेताओं के प्रबंधन का जिम्मा संभालने के लिए कमर कस रहे हैं। इस तरह की अटकलें भी हैं कि पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर लोग प्रशांत किशोर और उनकी टीम से संपर्क करने लगे हैं। इस तरह की भी खबरें हैं कि किशोर अभी अपनी नई भूमिका के बारे में तुरंत कोई फैसला नहीं करेंगे। ऐसा इसलिए भी है क्योंकि बिहार चुनाव में मिली सफलता और उससे पहले 2014 के लोकसभा चुनाव में टीम मोदी के साथ उन्हें मिली कामयाबी के बाद उनसे लोग काफी अपेक्षाएं रखेंगे।
लगभग सभी बड़े राजनीतिक दल किशोर जैसे रणनीतिकारों की मदद लेना चाहते हैं और आगामी राज्य विधानसभा चुनावों को देखते हुए स्वतंत्र एजेंसियों की पूछ बढ़Þ गर्इं है।
पश्चिम बंगाल और असम में अगले साल चुनाव होने हैं और उसके बाद उत्तर प्रदेश में 2017 में चुनाव होने हैं। असम चुनावों के लिए एक प्रमुख राजनीतिक मोर्चे ने नई राजनीतिक अभियान प्रबंधन कंपनी ‘आॅकलैंड ब्रिग्स’ को काम सौंपा है, वहीं यह कंपनी उत्तर प्रदेश की भी एक प्रमुख पार्टी से बातचीत कर रही है। दावा किया जा रहा है कि इस कंपनी ने स्थानीय जानकारों के साथ कुछ जानेमाने अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की भी सेवाएं लेना शुरू किया है और यह दूसरे राज्यों में एक से अधिक राजनीतिक दलों के लिए काम करने को भी तैयार लगती है। कंपनी के अधिकारियों ने गोपनीयता बरतते हुए उन पार्टियों के नाम नहीं बताए जिनके साथ उनकी बातचीत चल रही है। किशोर और उनकी टीम की सदस्यों से भी इस बाबत तत्काल कोई टिप्पणी नहीं मिल सकी है।
तीन मुख्यमंत्रियों और दो केंद्रीय मंत्रियों के लिए काम कर चुके स्वतंत्र जनसंपर्क सलाहकार अनूप शर्मा के मुताबिक राजनीतिक अभियानों के दौरान मतदाताओं की दिलचस्पी बदलती रहती है और राजनीतिक संचार सलाहकार ताजा रुझान को समझने में मदद करता है।






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