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यकीन कीजिए, रघुवंश भाई, अंतिम पंक्ति लिखते-लिखते मेरी आंखें भर आईं!

उर्मिलेश नहीं रहे रघुवंश भाई! जनता दल और फिर राष्ट्रीय जनता दल में जिन कुछ नेताओं से मुझे बातचीत करने या मिलने-जुलने का मन करता था, रघुवंश भाई, उनमें प्रमुख थे– और ये बात वह अच्छी तरह जानते थे. पत्रकारिता में होने के बावजूद मैंने नेताओं से निजी रिश्ते बहुत कम बनाये. राजनीतिक लोगों से प्रोफ़ेशनल रिश्ते ही ज्यादा रखे. नेताओं के लंच-डिनर से भी आमतौर पर दूर रहा. उन्हीं आयोजनों मे जाता रहा और आज भी वही स्थिति है, जहां निजी या प्रोफेशनल कारणों से जाना बहुत जरूरी हो!Read More


मीरगंज के डॉ. गौहर बने राजद के प्रदेश प्रवक्ता

सुनील कुमार मिश्र, बिहार कथा, हथुआ। राष्ट्रीय जनता दल चिकित्सा प्रकोष्ठ के प्रदेश प्रवक्ता पद पर मीरगंज के प्रसिद्ध सर्जन डॉ. गौहर आलम को मनोनीत किया गया है। राजद प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह के निर्देश पर चिकित्सा प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सुधीर कुमार द्वारा गठित प्रदेश कमेटी में डॉ. गौहर को यह महत्वपूर्ण जिम्मेवारी सौंपी गई है। मनोनयन के बाद डॉ.गौहर ने कहा कि बिहार सरकार की उदासीनता, लापरवाही और अकर्मण्यता के कारण बिहार में कोरोना महामारी विकराल रूप लेती जा रही है। स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह बदहाल है।Read More


गर्लफ्रेंड का मर्डर, लव मैरिज से नाराज घरवालों ने की हत्या

गोपालगंज।  गोपालगंज जिले के कटेया थाना क्षेत्र के राजापुर गांव में लव मैरिज से नाराज प्रेमिका के घरवालों ने प्रेमी के घर पहुंचकर परिवार के सदस्यों के साथ मारपीट की. बताया जता है कि मारपीट में प्रेमी, प्रेमिका, उसके पिता, चाचा व दादी को काफी गंभीर चोटें आई हैं. वहीं इस हमले में घायल प्रेमिका की मौत हो गई. कई अन्य लोग गंभीर रूप से घायल बताये जा रहे हैं जिनका इलाज सदर अस्पताल में चल रहा है. घटना की सूचना पाकर स्थानीय लोगों में काफी आक्रोश देखने को मिलRead More


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भूमिहारों के लिए ‘बांझ’ हो गया एमएलसी का विधान सभा कोटा

16वीं विधानसभा से एक भी भूमिहार नहीं बने एमएलसी वीरेंद्र यादव, पटना। बिहार विधान परिषद की 75 सीटों में 27 सीटें विधान सभा कोटे के लिए निर्धारित हैं। इन 27 सीटों के लिए विधायक मतदान करते हैं और उनके वोट से ही एमएलसी बनते हैं। विधान परिषद के लिए हर दो साल पर चुनाव होता है। वर्तमान व्‍यवस्‍था के अनुसार, एक बार में 11, दूसरी बार में 9 और तीसरी बार में 7 सीटों के लिए चुनाव होता है। 16वीं विधान विधान सभा का गठन 2015 में हुआ था। इसRead More


क्‍या श्‍याम रजक विधान सभा से इस्‍तीफा देने के लिए बाध्‍य थे?

वीरेंद्र यादव, पटना। किसी भी विधान सभा की अंतिम बैठक और चुनाव के बीच विधायकों की घुड़दौड़ शुरू हो जाती है। विधायक अपनी-अपनी सुविधा और समीकरण के हिसाब से खूंटा और नाद बदल लेते हैं। कुछ स्‍तबल के मालिक भी घोड़ों के ‘टाप’ के हिसाब से निर्णय लेते हैं। 16 अगस्‍त को राजद के प्रदेश अध्‍यक्ष जगदानंद सिंह ने विधायक प्रेमा चौधरी, फराज फातमी और महेश्‍वर यादव को पार्टी विरोधी गतिविधि के आरोप में बर्खास्‍त कर दिया तो उधर जदयू के प्रदेश अध्‍यक्ष वशिष्‍ठ सिंह ने अपने विधायक श्‍याम रजकRead More


मंत्री जी ! उमस में कब तब बिजली कटैती झेलेंगे हथुआवासी

हथुआ के विधायक सह मंत्री रामसेवक सिंह को संजय स्वदेश ने फिर सवालों से घेरा संवाददाता. गोपालगंज. हथुआ के विधायक सह बिहार के समाज कल्याण मंत्री रामसेवक सिंह को दलित ओबीसी जनजागरण संघ के संयोजक ने फिर सवालों से घेरा हैं. संजय स्वदेश ने मंत्री रामसेवक सिंह से पूछा है कि आखिर हथुआ विधानसभा क्षेत्र के लिए भीषण गमी और उमष में कब तक बिजली कटौती का दर्द झेलंगे. बिजली के कटने का न कोई टाइम है और न ही आने का टाइम है. संजय ने कहा कि मंत्री रामसेवकRead More


मीरगंज नगर पंचायत की राजीति में आई है गर्मी, क्या कुर्सी से बेदखल होंगे मोहिता कुमारी और धनंजय यादव

बिहार कथा. मीरगंज-गोपालंज. मीरगंज नगर पंचायत की अध्यक्षा मोहिता कुमारी व उपाध्यक्ष धनंजय यादव के खिलाफ शनिवार को विक्षुब्ध वार्ड पार्षदों ने अविश्वास प्रस्ताव पेश किया। इसकी कॉपी अध्यक्षा की अनुपस्थिति में कार्यपालक पदाधिकारी को सौंपा गया। चुनाव के लगभग 3 वर्षों के बाद मीरगंज नगर पंचायत में अध्यक्ष व उपाध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाए जाने पर नगर पंचायत की राजनीति अचानक गरमा गई है। मीरगंज नगर पंचायत की राजनीति में यह पहली बार हुआ है कि एक साथ अध्यक्ष व उपाध्यक्ष दोनों पर अविश्वास प्रस्ताव लाया गया हो।Read More


गोपालगंज की राजनीति में किस खेत के ‘मूली’ हैं अति पिछड़ा

गोपालगंज की राजनीति अति पिछड़ा कोई फैक्टर ही नहीं है ? बिहार कथा, गोपालगंज। जिले की राजनीति के पीछे 20 सालों के इतिहास पर नजर दौड़ा जाए तो यह मिलेगा की पक्ष और विपक्ष किसी ने अति पिछड़ा को टिकट योग्य नहीं समझा । यानी पिछले 20 सालों में किसी भी मुख्य राजनीतिक दलों ने अति पिछड़ा समाज के किसी व्यक्ति को टिकट नहीं दिया। कहा जाएं तो 2005 से ही अति पिछड़ा समाज का ज्यादातर वोट एनडीए के पक्ष में मिलता रहा है लेकिन एनडीए में अति पिछड़ों केRead More


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