रिटायर्ड डीआईजी का अजीबोगरीब शौक, शर्ट में लगाते हैं बुलेट के बटन
पटना। लोगों के शौक भी अजीबोगरीब होते हैं। एक आईपीएस आॅफिसर को गोलियों से ऐसा लगाव हुआ कि रिटायरमेंट के बाद भी अपने आप को अलग नहीं कर पाए हैं। पहले ए गोलियां अपराधियों के लिए थी अब इनके कपड़ों की शोभा बढ़Þाती है। अवकाश प्राप्त डीआईजी के बी सिंह अपने शौक को लेकर हमेशा चर्चा में रहते हैं। कपड़ों में गोलियों की बटन तो इनकी इलाके में पहचान है साथ ही पुरानी गाड़ियों के भी उतने ने ही शौकीन हैं।
सन 1971 में पुलिस की नौकरी में आने के बाद के बी सिंह बिहार झारखंड के कई जिलों में पुलिस सुधार पदाधिकारी के तौर पर काम किया। इस दौरान उन्हें पटना, रांची, चतरा और हजारीबाग जैसे जिलों में काम करने का मौका मिला। नालंदा जिले में भी बतौर आईपीएस श्री सिंह ने सेवा दिया। 1983 में के बी सिंह को आईपीएस कैडर मिला और डीआईजी के पद पर रहने के बाद वो रिटायर हुए। इनके पिता भी पुलिस आॅफिसर थे। पिता के देहांत के बाद जब एक छोटे से ड्रावर को खुलवाया तो उसमें बहुत सारी 3’8 की गोली मिली। पिता की स्मृति के तौर पर आईपीएस आॅफिसर ने गोलियों को संजो का रखने का फैसला लिया। सिंह ने तमाम गोलियों को एकत्रित कर बटन बनवाने का फैसला किया। अब ए पुलिस आॅफिसर शर्ट, टीशर्ट और कोर्ट में गोलियों वाली बटन का प्रयोग करते हैं। एक बटन सोनार से बनवाने में दो रुपए का खर्च होता है।
पुरानी गाड़ियों के भी शौकीन
के बी सिंह पुरानी गाड़ियों के भी शौकीन हैं। इन गाडियों को लाखों खर्च करके मेंटेंन रखते हैं। 1930 की आॅस्टिन आॅफ इंग्लैंड कार अब भी श्री सिंह के दरवाजे की शोभा बढ़Þाती है। इसके अलावा के बी सिंह के पास 1942 की बनी हुई फूड विंटेज क्लासिक जीप भी है जिससे वह कई इनाम जीत चुके हैं।
विजय माल्या ने दिया था लाखों का आॅफर
पुरानी गाड़ियों के शौकीन खरीददार भी के बी सिंह के पास आते रहते हैं। विजय माल्या ने भी इनकी आॅस्टिन आॅफ इंग्लैंड खरीदने के लिए लाखों रुपए का आॅफर दिया था। इसके अलावा राजस्थान से कई पुरानी गाड़ियों के शौकीन लोग खरीदने के लिए के बी सिंह के पास आते रहते हैं पर के बी सिंह गाडियों को बेचने से साफ तौर पर इन्कार कर देते हैं।
कंटेंट साभार : हिंदी इनायडु
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