मतदाता सूचियों की जांच के लिए विशेष दल जाएंगे बिहार
नई दिल्ली। बिहार में इस साल के आखिर में विधानसभा चुनाव हो सकते हैं और चुनाव आयोग मतदाता सूचियों से दोहरी प्रविष्टियां हटाने के उद्देश्य से कल अपने आॅडिटरों के चार विशेष दलों को राज्य भेजेगा। आधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी देते हुए बताया कि प्रत्येक दल में छह छह अधिकारी होंगे। चारों दल आयोग के नवगठित रेगुलेटरी आॅडिट डिवीजन के हैं और बिहार इनका पहला असाइनमेंट होगा।
आॅडिट डिवीजन का जिम्मा आयोग के दिशानिर्देशों या कानूनी प्रावधानों के उल्लंघन के विशिष्ट मामलों का पता लगाना है। मतदाता सूचियों की गुणवत्ता बनाए रखना भी इसका जिम्मा है। एक अधिकारी ने बताया कि टीम को मतदाता सूचियों से दोहरी प्रविष्टियां हटाने, नामों में सुधार करने, मतदाता फोटो पहचान पत्र वितरित करने और मतदाताओं द्वारा मतदाता पंजीकरण कार्यालय में दिए गए विभिन्न आवेदनों के निपटारे सहित मतदाता सूचियों के गहन अध्ययन का जिम्मा सौंपा गया है।
चारों दल बिहार का दौरा कल से शुरू करेंगे और वहां 13 जून तक रहेंगे। ये दल सभी 38 जिलों को कवर करेंगे। इन दलों का बिहार के लिए अगला दौरा 14 जून से 15 जुलाई तक और फिर अंतिम दौरा 16 जुलाई से तीन अगस्त तक रहेगा। बिहार की 243 सदस्यीय विधानसभा के लिए चुनाव सितंबर या अक्तूबर में होने की संभावना है।
आॅडिटर बिहार के दौरे में आम लोगों ओर राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से मिल कर उनकी शिकायतें सुनेंगे और अभ्यावेदन प्राप्त करेंगे। चुनाव आयोग ने 22 अप्रैल को उप चुनाव आयुक्तों और महानिदेशकों (व्यय निगरानी) का एक दल जमीनी स्तर पर आकलन के लिए नियुक्त किया था। आयोग ने 15 मई से 15 जुलाई तक विशेष त्वरित पुनरीक्षण (स्पेशल समरी रिवीजन) चलाया है। मतदाता सूचियों का मसौदा हाल ही में प्रकाशित किया गया है ताकि लोग 13 जून तक अपने दावे और आपत्तियां कर सकें। यह काम 13 जुलाई तक हो जाएगा तथा समीक्षा के बाद मतदाता सूचियों का प्रकाशन होगा।
विशेष त्वरित पुनरीक्षण के दौरान राज्य चुनाव मशीनरी मतदान केंद्र स्तर तक जा कर व्यापक कार्य कर रही है। सूत्रों ने बताया कि घर-घर जा कर एक से अधिक प्रविष्टियों की जांच की जाएगी और कानूनी प्रक्रिया के अनुसार अवांछित प्रविष्टियां हटाई जाएंगी। एक से अधिक प्रविष्टियों का पता लगाने के लिए एक ‘इमेज असेसमेंट सॉफ्टवेयर’ तैयार किया गया है जिसका बिहार में उपयोग किया जाएगा। सूत्रों के अनुसार, चुनाव आयोग 243 विधानसभा सीटों में से 36 में ‘वोटर वेरीफाइड पेपर आॅडिट ट्रायल’ (वीवीपीएटी) का उपयोग करेगा। इस क्रम में सीटों की संख्या बढ़ाई भी जा सकती है। वीवीपीएटी वह प्रक्रिया है जो मतपत्र विहीन मतदान प्रणाली का उपयोग कर मतदाताओं को फीडबैक देती है।
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