जमीन हड़पने के लिए दी जहर की सुई, 25 साल बाद उम्र कैद

18 कट्ठा जमीन के लिए की थी की हत्या हेरियासराय,दरभंगा। प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश सुरेन्द्र प्रसाद पाण्डे ने 27 मई को जहर की सुई देकर हत्या करने के मामले में अशोक पेपर मिल थाना क्षेत्र के पतोर सूर्यपुर टोला निवासी पारस मिश्र को दफा 302 भादवि के तहत उम्र कैद की सजा सुनाई है। साथ ही पांच हजार रुपएा अर्थदंड भी लगाया है। उक्त राशि का भुगतान नहीं करने पर एक वर्ष अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। इसके अलावा इस मामले के एक अन्य अभियुक्त नन्दकुमार मिश्र को दफा 201 भादवि में तीन वर्ष की कैद तथा दो हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड की राशि का भुगतान नहीं करने पर दो माह अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से अपर लोक अभियोजक चमक लाल पंडित ने बहस की। पंडित के अनुसार उपर्युक्त अभियुक्तों के विरुद्ध उसी गांव के कमलेश मिश्र ने 3 अगस्त 1990 को अपने बाबा रामेश्वर मिश्र को जहर की सूई डां. बौआ मिश्रा से दिलाकर हत्या कर साक्ष्य मिटाने के लिए आनन-फानन में लाश को जला दिया।
मृतक से साजिश के तहत शिवशंकर मिश्र ने अपनी पत्नी के नाम 18 कट्ठा जमीन दान पत्र के माध्यम से ले लिया जिसकी जानकारी के कारण हत्या का आरोप लगाते हुए प्राथमिकी अशोक पेपर मिश्र थाना कांड संख्या 53/90 दफा 302, 328, 201/34 भादवि के तहत दर्ज कराई थी। उपर्युक्त अभियुक्त को 25 मई को दोषी पाते हुए सजा के विन्दु पर सुनवाई हेतु 27 मई तारीख निर्धारित किया गया था जिसमें अन्य 9 आरोपितों को 25 मई को रिहा करने का आदेश दिया गया था।
नाती ने दिलाया बाबा को न्याय
25 वर्षों के बाद न्याय मिला। अशोक पेपर मिल थाना क्षेत्र के पतोर सूर्यपुर टोला निवासी कमलेश कुमार मिश्र ने अपने-बाबा रामेश्वर मिश्र के हत्यारे को सजा दिलाई। घटना 3 अगस्त 1990 की है। जब आरोपीगण मृतक को गुप्त रुप से बहला-फुसलाकर सूचक कमलेश कुमार मिश्र के चाचा शिवशंकर मिश्र अपनी पत्नी के नाम 18 कट्ठा जमीन का दान पत्र निष्पादित करा लिया। जिसमें पारस मिश्र की अहम भूमिका रही थी। दान पत्र निष्पादन के बाद मृतक जब अपने गांव गए तो उनके हाथ में काला लगा देख कर परिवार के लोगों ने पूछताछ की। मृतक ने सारी बातें बताई। इसकी जानकारी आरोपितों को हुई तो आरोपितगण घबरा गए। षड्यंत्र के तहत रामेश्वर मिश्र को डां. बौआ मिश्र को बुलाकर जहर की सुई दिलाकर हत्या को इंतजाम दिया। मामले की सुनवाई के दौरान आरोपितों ने सूचक के परिवार वाले पर ही हत्या का आरोप लगा डाला। आखिर सच्चाई छुपती नहीं है। इसका परिणाम सजा मिलने के बाद आरोपितों को मिल गया है।
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