राष्ट्रपति चुनाव : पीएम मोदी के दांव से चित विपक्ष को एकजुट करने में जुटी कांग्रेस
नई दिल्ली/पटना. ए. कांग्रेस समेत कई प्रमुख विपक्षी दल कई हफ्तों से राष्ट्रपति चुनाव के लिए कमर कसे हुए थे. सोनिया गांधी के आवास पर विपक्षी दलों के नेताओं की एक महाबैठक भी हुई. उस बैठक के आगे पीछे भी ममता बनर्जी और नीतीश कुमार जैसे नेता देश का अगला राष्ट्रपति कौन होना चाहिए? के मुद्दे पर चर्चा करने के लिए सोनिया से मिले. दूसरी तरफ राष्ट्रपति बनवाने के लिए जरूरी वोटों से महज चंद कदम दूर खड़ी भाजपा चुपचाप ये नजारा देखती रही. मीडिया और सोशल मीडिया ने भाजपा के राष्ट्रपति उम्मीदवार के तौर पर कई नाम उछाले लेकिन खुद भाजपा के के किसी नेता ने किसी भी नाम पर कोई चर्चा नहीं की. यहां तक कि विपक्षी दलों से बातचीत के लिए बनाई गई राजनाथ सिंह, वेंकैया नायडू और अरुण जेटली की कमेटी ने भी पार्टी के राष्ट्रपति उम्मीदवार के नाम का संकेत नहीं दिया. राजनाथ और वेंकैया जब कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मिलने तो उन्होंने सोनिया को भाजपा के उम्मीदवार का नाम न बताकर उन्हीं से पूछ लिया कि वो क्या सोच रही हैं. और जब सोमवार को भाजपा ने बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोविंद का नाम राष्ट्रपति उम्मीदवार के तौर पर घोषित किया तो अचानक ही विपक्ष का इतने दिनों से बनाया जा रहा एकजुटता बिखरने लगी.
नीतीश को मनाएंगे आजाद
भाजपा ने एक गैर-विवादित वरिष्ठ अपनी ही पार्टी के वरिष्ठ दलित नेता रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति उम्मीदार बनाकर कांग्रेस के तोते उड़ा दिए हैं. यूपी के रहने वाले कोविंद बिहार के राज्यपाल हैं. उनका राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मधुर संबंध रहे हैं, ऐसा खुद जदयू नेता केसी त्यागी ने कहा है. अभी तक आई रिपोर्टों के अनुसार ये लगभग तय माना जा रहा है कि नीतीश कुमार कोविंद की उम्मीदवारी को समर्थन देने जा रहे हैं. और शायद इसी को भांप कर वरिष्ठ कांग्रेसी नेता गुलाम नबी आजाद के पटना पहुंच गए हैं. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार आजाद नीतीश को नाजुक वक्त में विपक्ष के संग एकजुटता बरकरार रखने की अहमियत समझाएंगे.
मायावती ने भी दिखाया सकारात्मक रुख
रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति उम्मीदवार बनाकर भाजपा ने दूसरा सबसे बड़ा किला उत्तर प्रदेश में फतह किया है. सपा और बसपा दोनों के लिए कोविंद का विरोध करना मुश्किल हो गया है. बसपा प्रमुख मायावती ने तो कह भी दिया है कि अगर विपक्ष बेहतर दलित उम्मीदवार नहीं उतारता तो वो कोविंद को लेकर सकारात्मक हैं. जाहिर है नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस को मजबूर कर दिया है कि बीजेपी की पिच पर आकर खेलें. कोविंद यूपी के कानपुर के रहने वाले हैं. ऐसे में मायावती और अखिलेश यादव के लिए उनका विरोध करना क्षेत्रीय भावनाओं के खिलाफ भी होगा क्योंकि अगर कोविंद जीते तो लंबे समय बाद यूपी का कोई नेता राष्ट्रपति बनेगा.
भाजपा की पंसद पर मुलायम की मुहर
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार मुलायम सिंह यादव ने तो भाजपा की पसंद पर मुहर लगा भी दी है. अखिलेश ने आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा है, लेकिन दलित विरोधी और यूपी विरोधी ठहराए जाने का डर तो उन्हें भी सता रहा होगा.
दक्षिण भारत से भी मिलेगा समर्थन
रामनाथ कोविंद के भाजपा उम्मीदवार घोषित किए जाने की सूचना पीएम नरेंद्र मोदी ने खुद फोन करके तेलंगाना के सीएम और तेलंगाना राष्ट्रीय समिति के प्रमुख के चंद्रशेखर राव को दी. राव ने तत्काल ही कोविंद के नाम पर अपनी सहमति भी दे दी. माना जा रहा है कि तमिलनाडु के सीएम ई पलानीस्वामी भी कोविंद का विरोध नहीं करेंगे. लेकिन हारे को हरिनाम की तर्ज पर कांग्रेस ने अपने दूत को जेल में बंद शशिकला नटराजन को मनाने के लिए भेजा है. पलानीस्वामी शशिकला कैंप के समर्थन से ही राज्य के मुख्यमंत्री बने हैं. विपक्ष किस हद तक अपने बिखरते हुए कुनबे को एकजुट रख पाएगा ये तो वक्त बताएगा लेकिन अभी तो यह कहा ही जा सकता है कि नरेंद्र मोदी ने साबित कर दिया है कि अगर विपक्ष डाल डाल है तो वो पात पात हैं.
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