तर्क के साथ नीतीश ने की एक बार फिर की बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग
बिहार कथा न्यूज नेटवर्क
पटना. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विभाजन के बाद राज्य को हुये वित्तीय नुकसान, विकास की दौड़ में पिछड़ जाने और चौदहवें वित्त आयोग की अनुशंसाओं में विकास की अनदेखी किये जाने का हवाला देते हुये एक बार फिर बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग की है। श्री कुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे पत्र की प्रति आज मीडिया में जारी की जिसमें कहा कि 14वें वित्त आयोग द्वारा राज्यों को अंतरित किये जाने वाले हिस्से को 32 प्रतिशत से बढ़ाकर 42 प्रतिशत किये जाने की अनुशंसा को आधार बनाते हुये केंद्रीय बजट में केंद्र प्रायोजित योजनाओं में राज्य को दी जाने वाली राशि में काफी कमी की गई, जिसका प्रतिकूल प्रभाव बिहार पर अधिक पड़ा है। उन्होंने कहा कि आयोग की सिफारशों के विरुद्ध बिहार को मिलने वाली अंतरित कर की राशि में कमी आई है। वर्ष 2015-16 में 7400 करोड़ रुपये और वर्ष 2016-17 में लगभग 6000 करोड़ रुपये की कमी आई है। इस प्रकार दो वर्ष में कुल 13400 करोड़ रुपये की कमी आई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने कर-अंतरण के फॉर्मूले में बढ़ोतरी का हवाला देतेे हुये अनुदान मद में राशि की कटौती कर रही है, जिससे बिहार जैैसे पिछड़े राज्य में विकास योजनाओं के क्रियान्वयन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2015-16 में केंद्र प्रायोजित योजनाओं में केंद्रांश की अनुमोदित राशि 23988 करोड़ रुपये थी जबकि वास्तविक रूप से राज्य को 15932 रुपये ही आवंटित हुये। इसी प्रकार वर्ष 2016-17 में अनुमोदित राशि 28777 करोड़ रुपये थी जबकि 17143 करोड़ रुपये ही प्राप्त हुये। इस तरह दो वित्त वर्ष में 19690 करोड़ रुपये कम प्राप्त हुये। श्री कुमार ने कहा कि बिहार जैसे पिछड़े राज्य के लिए यह चिंता की बात है कि राज्यों के बीच निधि के बंटवारे में 14वें वित्त आयोग ने जो फॉर्मूला दिया है उसके आधार पर कुल राशि में बिहार का हिस्सा 10.9 प्रतिशत से घटकर 9.665 प्रतिशत रह गया है। आयोग ने क्षेत्रफल तथा प्राकृतिक वनों की अधिकता को मान्यता दी है जबकि बिहार जैसे अधिक जनसंख्या घनत्व एवं स्थलरुद्ध राज्य की विशिष्ट समस्याओं की अनदेखी की है। उन्होंने कहा, इस पृष्ठभूमि में हमारी मांग है कि बिहार को विशेष राज्य का दर्जा मिलना आवश्यक है।
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