जवानी में भरे दारोगा भर्ती का फर्म, बुढ़ापे में लगानी पड़ रही दौड़
दारोगा की दौड़: 40 के पार हुए तो दौड़ लगानी हो रही मुश्किल
नंदन कुमार शर्मा.गया।
एक ओर दारोगा पद पर बहाल होने का जज्बा है, तो दूसरी ओर चालीस के पार उम्र। इस जज्बे के आगे उम्र रोड़ बनकर खड़ा है। 16 सौ मीटर की दौड़ लगाने में सांसें फूल रही हैं। दौड़ लगाने वाले अभ्यर्थियों ने यह नहीं सोचा होगा कि जवानी में निकली बहाली के बाद उन्हें ढलती उम्र में दौड़ लगाना पड़ेगा। सिर्फ महिला उम्मीदवारों को इसमें छूट मिली हुई है। मामला, साल 2004 में दारोगा पद की बहाली का है। सरकारी पेच में फंसा इस मामले का फैसला 12 साल बाद हो रहा है। अब इसके अभ्यर्थी उम्र की ढलान पर पहुंच चुके हैं। कुछ को छोड़ सभी की शादी हो चुकी है। बच्चे जवान हो रहे हैं और चालीस के पार पहुंचे बच्चों के पिता दारोगा पद के लालच में बहाली में आने से अपने को रोक नहीं पा रहे हें। हालत यह है कि दौड़ लगाने के लिए जोश के साथ ट्रैक पर तो जा रहे हैं, लेकिन एक-दो राउंड में इस कदर सांस फूल रही है कि बीच में ही दौड़ से हट जा रहे हैं। गया कॉलेज खेल परिसर में सोमवार से शुरू हुई शारीरिक जांच के लिए पहुंचे अभ्यर्थियों में आधे से अधिक चालीस की उम्र पार कर चुके थे। 12 साल पहले दारोगा पद की निकली बहाली के समय दौड़ लगाने का जो जज्बा होगा, वह अब नहीं दिख रहा था। दिनेश सिंह नाम के एक अभ्यर्थी ने बताया के वे 46 साल के हो गए हैं। ऐसे में क्या वे 16 सौ मीटर दौड़ लगा पाएंगे। सरकार उनके साथ सौतेला व्यवहार कर रही है।
दो दिनों में आठ ही पूरी कर सके दौड़
सोमवार को मगध क्षेत्र के 473 अभ्यर्थियों में 122 गया कॉलेज खेल परिसर पहुंचे। शाम तक इनमें से मात्र आठ का ही चयन किया गया। इसमें पांच महिलाएं हैं। महिलाओं का दौड़ नहीं लिए जाने से उनका आसानी से चयन हो जा रहा है। वहीं मंगलवार की दोपहर तक दौड़े 120 अभ्यर्थियों में से सात का चयन हो चुका है। चयनित अभ्यर्थियों में पांच पुरुष व दो महिलाएं हैं। यानी दो दिनों की बहाली के दौरान करीब 350 में से 15 अभ्यर्थी ही चुने गए हैं। इनमें सात केवल महिलाएं हैं। with thankx from http://www.livehindustan.com
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