डॉक्टर की लापरवाही, 6 बच्चों की मौत, पैसे लेकर फेंकवा दिया नन्हे शव
रमन ठाकुर, सहरसा।
रविवार 8 नवंबर की रात जब पूरा प्रदेश चुनावी परिणाम के जश्न में सराबोर था उस समय कोसी के पीएमसीएच कहलाने वाले सदर अस्पताल में मानवीयता कलंकित हो रहा था। एक ही रात ग्यारह बच्चों के जन्म का गवाह बना अस्पताल में डॉक्टर और नर्स की लापरवाही से आधा दर्जन नवजात ने दम तोड़ दिया। हद तो तब हो गई जब अपनी लापरवाही पर पर्दा डालने के लिए अस्पताल प्रशासन ने कराह रही महिलाओं के परिजनों से ही दो-दो सौ रुपए लेकर पांच शवों को दफनाने के नाम पर फेंकवा दिया।
एक नवजात की लाश अस्पताल के बगल स्थित झाड़ी से बरामद की गई जबकि एक के परिजन वहीं डटे रहे। हालांकि अस्पताल के रजिस्टर से लेकर ड्यूटी पर तैनात नर्स विनीता कुमारी ने सिर्फ चार नवजात के दम तोड़ने की पुष्टि कर रही है। इस घटना के बाद जमकर हंगामा हुआ। पुलिस भी पहुंची लेकिन परिजनों का सुधि लेने वाला कोई नहीं था। सुबह होने पर अस्पताल की काली सच्चाई जब फैली तो फौरन नवनिर्वाचित विधायक अरुण कुमार यादव अस्पताल पहुंचे और घटना को शर्मसार बताते हुए सिविल सर्जन को तलब किया।
सिविल सर्जन डॉ. अशोक कुमार सिंह ने मामले को गंभीर बताते हुए दोषियों पर सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया। डॉ. ने पूरे मामले की जांच का आदेश दिया है। बाद में महिषी से नवनिर्वाचित विधायक अब्दुल गफूर भी अस्पताल पहुंचे और वहां की कुव्यवस्था पर नाराजगी जाहिर की। अस्पताल के रजिस्टर के मुताबिक लापरवाही के कारण जिनके बच्चे मरे है मोरकाही की सोनी कुमारी, बेला पंचायत के चकला टोला की रंजन देवी, महपुरा की मीनू देवी और नरियार की प्रीती देवी है।
अपने नवजात नाती की शव गोदी में लिए सुनैना देवी ने कहा कि इलाज के अभाव में उसकी बेटी की कोख सुनी हो गई। अगवानपुर के दुमा गांव की रहने वाली सुनैना ने बताया उसके नाती को आॅक्सीजन देने वाला कोई नहीं था। स्थानीय नवनिर्वाचित विधायक अरुण यादव के आने के बाद उस समय स्थिति विदारक हो गई जब मोरकाही की रहने वाली सोनी कुमारी की ससुर रामपुकार यादव ने रविवार की रात की कुव्यवस्था को उजागर करते हुए फफक- फफक कर रोने ने लगे। रामपुकार ने विधायक से कहा की उसे भी कहा गया की दो सौ रुपए देकर नवजात की लाश को फेंकवा दीजिए।
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