बिहार बोर्ड : कॉपी में रुपया, जांचने वाले 'महान'
सहरसा।पिछले महीने एग्जाम सेंटर की दीवारों पर चढ़े अभिभावकों की वह तस्वीर दुनिया भर में फेमस हुई जिसमें पैरंट्स अपने बच्चों को दसवीं बोर्ड की परीक्षा में नकल करा रहे थे। इस तस्वीर के जरिए बिहार में शिक्षा की स्थिति पर कई गंभीर सवाल खड़े किए गए थे। दरअसल, बिहार में इतनी बुरी स्थिति केवल परीक्षार्थियों की ही नहीं है बल्कि परीक्षा लेने वालों और कॉपी जांच करने वालों की भी है। यदि इन्हें भी बोर्ड की परीक्षा में बैठा दिया जाए तो नकल करने की जरूरत पड़ेगी।
बिहार बोर्ड परीक्षा के चेयरमैन लालकेश्वर प्रसाद सिंह ने कहा, ‘सुधार की गुंजाइश हमेशा रहती है लेकिन कुल मिलाकर मैं कॉपी मूल्यांकन से संतुष्ट हूं। मैंने निष्पक्षता और क्षमता को सुनिश्चित करने के लिए राज्य में परीक्षा के वक्त कई परीक्षा केंद्रों का दौरा किया गया था।’ इस साल के शुरुआत में कोर्ट ने 3,000 प्राथमिक विद्यालयों के टीचर्स को हटाने का आदेश दिया था। ये टीचर्स योग्यता जांच परीक्षा में दो बार फेल हो गए थे। इन शिक्षकों से क्लास पांच लेवल की इंग्लिश, मैथ्स और हिन्दी के सवाल पूछे गए थे।
जब वह तस्वीर विदेशी मीडिया समेत ऑनलाइन वायरल हुई तो 1,700 परीक्षार्थियों और 38 स्टूडेंट्स निष्कासित किए गए। 132 अभिभावकों को अरेस्ट किया गया। जब राज्य के शिक्षा मंत्री प्रशांत कुमार शाही से इस मसले पर सवाल पूछा गया था तो उन्होंने कहा था कि क्या हमलोग उन्हें गोली मार दें? राज्य में बोर्ड परीक्षा के दौरान हो रही नकल को बिहार सरकार दशकों से रोकने में नाकाम रही है।
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