History of India

 
 

बिहार में एक ऐसा मस्जिद जिसे हिन्दू रखते हैं आबाद

अशहर गौहाटवी हिन्दूओं का गांव है। यहां कोई मुस्लिम नहीं रहता है। यहां 100 साल पुरानी मस्जिद है। मस्जिद से 5 वक़्त की अज़ान होती है। मस्जिद को रोज़ाना धोया जाता है। वीरान पड़ी इस मस्जिद को आबाद गांव का हिन्दू समुदाय किया है। हर रोज़ पांचों वक़्त की अज़ान होती है। गांव के हिन्दूओं को अज़ान नहीं आता तो वह टेप रिकार्डर से, पेन ड्राइव से या फिर मोबाइल पर अज़ान की रिकार्डिंग चलाते हैं। ये मस्जिद बिहार के नालंदा ज़िले के मारी गांव में मस्जिद की ऊंची-ऊंची मीनारेंRead More


बिहार की हिडेन हिस्ट्री : कौण्डिन्य- फुनान वंश का संस्थापक

कौण्डिन्य- फुनान वंश का संस्थापक पुष्यमित्र के फेसबुक timeline से साभार प्राचीन भारत के इतिहास में कई कौण्डिन्य का जिक्र मिलता है। एक कौण्डिन्य उन सात ब्राह्मणों में से एक था जिसने राजकुमार सिद्धार्थ के गौतम बुद्ध होने की भविष्यवाणी की थी और बुद्धत्व प्राप्त होने पर वह सबसे पहले उनका शिष्य बना। उसके साथ के चार अन्य शिष्य उसी की प्रेरणा से गौतम बुद्ध के शिष्य बने थे। हालांकि इतिहास इसके आगे उस कौण्डिन्य के बारे में कुछ नहीं बताता। मगर यहां हम उस कौण्डिन्य के बारे में बातRead More


बिहार की हिडेन हिस्ट्री : संघमित्ता-संघमित्रा

Bihar Katha

संघमित्ता-संघमित्रा पुष्यमित्र, फेसबुक से साभार श्रीलंका में दिसंबर महीने के पूर्णिमा की तिथि को एक पर्व मनाया जाता है, उदुवापा पोया. पोया का आशय संभवतः पूर्णिमा से ही है. क्योंकि वहां हर महीने की पूर्णिमा तिथि को कोई न कोई पोया पर्व मनाया जाता है. हर पोया पर्व बौद्ध धर्म से संबंधित है. उदुवापा पोया पर्व जो साल का आखिरी पर्व है, उसे एक और नाम से भी पुकारा जाता है, संघमित्ता डे. संघमित्ता डे यानी संघमित्ता दिवस. संघमित्ता मने संघमित्रा, दुनिया के सर्वकालिक महान राजा में से एक अशोकRead More


जब जोधाबाई के कहने पर अकबर ने दरभंगा में लगाया था आम का बगीचा

पुष्य मित्र  आम का सीजन उफान पर है. इस साल भरपूर आम बाजार में उपलब्ध है, कीमत भी कम है, लिहाजा पूरा हिंदुस्तान खुलकर आम के रस में सराबोर हो रहा है. वह फलों का राजा आम जो दुनिया भर में भारत के फल के तौर पर जाना जाता है, क्या आप जानते हैं कि बिहार के दरभंगा शहर को कैपिटल ऑफ मैंगो कहा जाता रहा है. तो आइये आम के इस मौसम में मिथिला के इलाके में शहंशाह अकबर के बगीचों की कहानी जानते हैं. वैसे तो भारत में आमRead More


आपातकाल, स्मरण, संघर्ष और सबक

Jai Shankar Gupt इस 25-26 जून को आपातकाल की 43वीं बरसी मनाई जा रही है. इस साल भी पिछले 42 वर्षों की तरह आपातकाल के काले दिनों को याद करने की रस्म निभाने के साथ ही लोकतंत्र की रक्षा की कसमें खाई जा रही हैं। वाकई आपातकाल और उस अवधि में हुए दमन-उत्पीड़न और असहमति के स्वरों और शब्दों को दबाने के प्रयासों को न सिर्फ याद रखने बल्कि उनके प्रति चैकस रहने की भी जरूरत है ताकि देश और देशवासियों को दोबारा वैसे काले दिनों का सामना नहीं करनाRead More


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