Dhru Gupt

 
 

कवि तानसेन !

Dhru Gupt संगीत सम्राट तानसेन भारतीय शास्त्रीय संगीत के कुछ शिखर पुरुषों में एक रहे हैं। ‘आईने अकबरी’ के लेखक इतिहासकार अबुल फज़ल ने उनके बारे में कहा था – ‘पिछले एक हज़ार सालों में उनके जैसा गायक नहीं हुआ।’ उनका सांगीतिक व्यक्तित्व इतना बड़ा था कि उसके पीछे उनके व्यक्तित्व के दूसरे तमाम पहलू ओझल हो गए। बहुत कम लोगों को पता है कि ग्वालियर के पास एक छोटे-से गांव बेहट के चरवाहे से सम्राट अकबर के दरबार के प्रमुख गायक के ओहदे तक पहुंचे तानसेन एक बेहतरीन कविRead More


आईए, पृथ्वी का क़र्ज़ उतारें !

Dhru Gupt पृथ्वी के पर्यावरण को बिगाड़ने में कारखानों से निकलने वाले धुओं और खतरनाक रसायनों से कम भूमिका प्लास्टिक या पोलीथिन कैरी बैग की नहीं है। एक पोलिथिन बैग तैयार करने के लिए सिर्फ चौदह सेकंड ही चाहिए, लेकिन इसे नष्ट होने में चौदह हज़ार साल तक लग सकते है। एक बार प्रयोग कर फेंके गए पोलिथिन बैग धूल और मिट्टी के साथ ज़मीन में दब जाते हैं जो हज़ारों सालों तक बारिश का पानी ज़मीन के भीतर नही जाने देते। ज़मीन का वह टुकड़ा धीरे-धीरे बंजर हो जाताRead More


वो कागज़ की कश्ती वो बारिश का पानी !

Dhruv Gupt देश में मानसून की बारिश शुरू हो चुकी है। शुरुआत की थोड़ी-सी बारिश के साथ मीडिया में कई शहरों और गांवों में पानी से आई आफत की ख़बरें तैरने लगी है। अपने बचपन के दिन याद करिए जब सावन-भादो की बारिश शुरू होती थी तो कई-कई दिनों तक रुकने का नाम नहीं लेती थी। सड़क और खेत सब पानी-पानी। खपड़ैल का घर टपकता था और रात अपनी खाट घर के इस कोने से उस कोने तक खिसकाने में बीत जाती थी। बारिश या बाढ़ का पानी घरों मेंRead More


क्या बलात्कारियों को जीने का हक़ है ?

Dhruv Gupt उत्तर प्रदेश के बलिया में छुट्टियों से लौट रही एक सत्रह साल की छात्रा की बलात्कार के बाद हत्या की त्रासद खबर अभी ठंढी भी नहीं पड़ी थी कि मध्यप्रदेश के मंदसौर में आठ साल की एक नन्ही बच्ची के साथ बलात्कार और उसके साथ अमानुषिक सलूक की खबर देखकर हर संवेदनशील व्यक्ति भीतर तक हिल गया होगा। देश के कोने-कोने से जिस तरह नन्ही बच्चियों और किशोरियों के साथ बलात्कार, सामूहिक बलात्कार और उनकी नृशंस हत्याओं की खबरें आ रही हैं, उससे पूरा देश सदमे में है।Read More


बिहार के एक आईपीएस की भावुक कर देने वाली सच्ची घटना

बिहार के एक आईपीएस की भावुक कर देने वाली सच्ची घटना ध्रुव गुप्त बात तीस साल पहले की है जब मैं बिहार के एक अपराधग्रस्त जिले पश्चिमी चंपारण में पदस्थापित था। वह एक भयंकर बरसाती रात थी। मैं गंडक दियारे में छापेमारी करने के बाद पुलिस के कुछ जवानों के साथ बगहा लौट रहा था। रास्ते में गाडी बिगड़ गई जिसके बनने की संभावना अगली सुबह तक नहीं थी। गांव से कई घरों से कुछ खाट मंगाकर हम किसी किसान के एक बड़े-से बरामदे में आराम करने लगे। मैं थकाRead More


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