लोकसभा चुनाव 2019: बिहार के सुशासन नगर में ‘लालटेन’ ही फैला रही है रौशनी

पुष्यमित्र (hindi.asiavillenews.कॉम से साभार)
 
‘लोग अंधकार से डरते थे. माता-पिता अपने बच्चे को समझाते थे कि बाबू बाहर मत जाओ, बाहर भूत है. भूत का भय दिखाकर बच्चों को नियंत्रित रखते थे. और जरूरत पड़ने पर लोग लालटेन का इस्तेमाल करते थे, ढिबरी का इस्तेमाल करते थे. किरासन तेल का प्रयोग करते थे. आज घर-घर बिजली पहुंच गई. भूत भी भाग गया और लालटेन की जरूरत खत्म हो गई, इस पूरे बिहार से.’
ये शब्द बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के हैं. तीन मार्च को पटना में आयोजित एनडीए की संकल्प रैली में प्रधानमंत्री के सामने नीतीश कुमार ने अपनी तमाम उपलब्धियों के बीच यह उपलब्धि जोर से बताई कि बिहार के घर-घर में बिजली पहुंच गई है. उन्होंने कहा कि अब बिहार से लालटेन की जरूरत खत्म हो गई है.
लेकिन सच्चाई इससे कहीं जुदा है. इसे संयोग कहें या विडंबना कि नीतीश कुमार की पहचान जिस सुशासन बाबू के नाम से थी, उनके इसी नाम पर बसे बिहार के किशनगंज जिले के सुशासन नगर में लालटेन ही रौशनी का इकलौता स्रोत है.
किशनगंज जिले के टेढ़ागाछ से करीब 10 किलोमीटर अंदर जाने के बाद खेत की मेड़ पर एक किलोमीटर पैदल चलते हुए ‘सुशासन नगर’ पहुंचा जा सकता है. सुशासन नगर में दर्जनों परिवार रहते हैं. इनमें से किसी भी घर में बिजली कनेक्शन नहीं है. ये सभी लोग रौशनी के लिए ढिबरी या लालटेन पर निर्भर हैं.
सुशासन नगर के अलावा अंबाडी संथाली का आबादी टोला, चैनपुर बिहार का मुसहर टोली, खटिया टोली, मुस्लिम टोला खंडव र्खराडा, धबेली पंचायत के महादलित टोला, बिहार मुशहरी जैसे कई टोलों की यही कहानी है. इन टोलों में रहने वाली पांच हजार से अधिक की आबादी बिजली कमी से जूझ रही है.
क्या कहते हैं स्थानीय लोग
पंच सहदेव ऋषिदेव बताते हैं कि कई बार उन्होंने बिजली को लेकर आंदोलन भी किया. लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात ही रहा. बिजली के अलावा इस सुशासन नगर के लोग सड़क और अन्य योजनाओं के लाभ से भी वंचित हैं. उन्होंने बताया कि स्कूल भी दूर हैं और सड़क कट जाने के कारण स्कूल जाने के दौरान उनके नाती की मौत हो गई.
सुशासन नगर के ही बालेश्वर ऋषिदेव कहते हैं, ‘मैं मजदूरी करता हूं. पढ़ा-लिखा नहीं हूं. मेरे बाप-दादा भी पढ़े लिखे नहीं थे. और अब मेरा बेटा भी पढ़ नहीं पा रहा है. बिजली नहीं आएगी तो क्या विकास होगा?’
स्थानीय पत्रकार अबू फरहान छोटू इस मुद्दे को लेकर मुखर रहते हैं. उन्होंने बताया, ‘कई बार इस मुद्दे पर खबरें छापी लेकिन प्रशासन के कान में जूं नहीं रेंग रही. अब तो आलम यह है कि आजिज आकर लोगों ने अंधेरे को ही अपना नसीब मान लिया है.’
सच्चाई से दूर हैं सरकारी आंकड़े
केंद्र सरकार ने सौभाग्य योजना के तहत 31 मार्च तक देश के हर घर में बिजली पहुंचाने का दावा किया है. हालांकि पूर्व में सरकार ने 31 दिसंबर तक का लक्ष्य निर्धारित किया था. सौभाग्य योजना के लिए 16,320 करोड़ रुपये की राशि भी आवंटित की गई थी.
बिहार सरकार तो पहले से ही अपनी पीठ थपथपा रही है. केंद्र सरकार की रिपोर्ट के मुताबिक बिहार पिछले साल अक्टूबर में ही देश के उन आठ राज्यों में शामिल हो गया था, जिन्होंने सौ फीसदी घरों में बिजली पहुंचा दी. लेकिन जमीनी सच्चाई कुछ और ही बयां कर रही है. सुशासन टोला में ही सुशासन बाबू के सारे दावे धराशायी हो जाते हैं.
(सोमू आनंद के सहयोग से)
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