गोपालगंज के पं दीनदयाल स्टेडियम पर लगी कुव्यवस्था की डायन !

पं दीनदयाल उपाध्याय स्टेडियम पर लगी कुव्यवस्था की डायन !
खेल-खिलाड़ी संकट में, शराबी, गंजेड़ी-भंगेड़ी मौज में !
पशुओं का चारागाह, वाहनों का स्टैंड !
विजय तिवारी
पं दीनदयाल उपाध्याय स्टेडियम । जिसे भीएम स्कूल का फिल्ड भी कहा जाता है । इस फिल्ड पर तरह-तरह के डायनों की नजर लग गई है । गाय, भैंस के साथ-साथ सूअरों का सुरक्षित चरागाह बन गया है । लोग अपने पशुओं को यहां हांक कर मौज से घर में पड़े रहते हैं । कई बार इन अवारा पशुओं ने खिलाडियों पर हमला भी किया है । लेकिन खिलाड़ी पशु मालिकों से शिकायत कर पशुओं के बाद अब उन मालिकों के हमले का शिकार नहीं होना चाहते ।
स्वच्छता की पोल खुलती देखनी हो, तो इस स्टेडियम से बेहतर कोई जगह नहीं । स्टेडियम के भीतर लगभग चारो तरफ कूड़े-कचड़े का अंबार । आसपास के लोगों के लिए जैसे यह स्टेडियम नहीं, कूड़ादान बन गया हो । हर रोज कूड़े-कचड़े के बीच खेल अभ्यास करना मजबूरी बन गया है । स्वास्थ्य लाभ के लिए टहलना कितना लाभप्रद होगा । कुछ दिन आकर यहां अनुभव किया जा सकता है । नगर परिषद से इस आशय की शिकायत करना अब बेमतलब की बात हो गई है । कूड़ा फेंकने वालों से तो शिकायत की सोचने की भी किसी में हिम्मत नहीं । दर्जनों लोगों से बैर का मतलब आप भी बखूबी समझ सकते हैं । मनमर्जी या दबंगई का आलम यह है कि कई लोगों ने चहारदीवारी मे छेद कर अपने गंदा नाले का मुंह स्टेडियम के भीतर ही खोल दिया है । हालत यह है कि इन बजबजाते नालों के आसपास बच्चे खेलने कुदने को विवश हैं । कूड़ा फेंकने में असुविधा नहीं हो । इसके लिए कई लोगों ने चहारदीवारी ही गिरा दिया है ।
स्टेडियम पर अवैध शराब पीने वालों, स्मैकियरों तथा जुआ खेलने वालों का आतंक इस कदर व्याप्त रहता है कि बच्चे डर के मारे सहमे रहते हैं । पता नहीं कब इनसे पाला पड़ जाए और उनके आतंक का कोपभाजन बनना पड़े । कई बार स्टेडियम में खेलते कुदते बच्चों की पिटाई की खबर आती रहती है । किन्तु फिर दूबारा ना पिट जाएं । इस भय से वे चूप रह जाने में भलाई समझते हैं ।
लेकिन स्टेडियम मे खेल अभ्यास करने आने वाली लड़कियों को तो दोहरे आतंक का शिकार होना पड़ता है । इन लफंगेबाजों द्वारा छेड़खानी व बदतमीजी का भय । एक दो बार सामुहिक विरोध हुआ भी । लेकिन घर लौटते वक्त रास्ते में अकेले घेरकर मारपीट या बेईज्जत कर देने की धमकी ने उन्हें चूप रहने को भयभीत कर देता है ।
आतंक मचाने वाले तथा कूड़ादान व चरागाह बनाने वाले कुव्यवस्था के इन डायनों के कहर से बचाने की आस कब पूरी होगी ? प्रशासन व नगर परिषद कब तक हाथ पर हाथ रखे, बैठा रहेगा ?






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