मंदिर के दरबार में हाजिरी लगाने वाले सभी भक्तों की मुरादें पूरा करती है बेगूसराय सिद्ध पीठ की बड़की दुर्गा अस्थान बीहट।

बिहार बेगूसराय से पत्रकार नंद किशोर सिंह: —

बेगूसराय बीहट के गुरुदासपुर टोला में सिद्ध पीठ यहाँ पर एक दुर्गा का मंदिर है ।जहां मां दुर्गा का मंदिर पूरे जिला में सबसे ऊँचा दुर्गा मंदिर है ।यह मंदिर 11 मंजिला का 185 फीट ऊंचा है। इस मंदिर का निर्माण जन सहयोग से करोड़ों रुपए की लागत से बनाया जा रहा है ।दुर्गा मंदिर को नए सिरे से नव निर्माण का कार्य 14 फरवरी 2009 से प्रारंभ हुआ ।जो अभी तक मंदिर का जीर्णोद्धार का काम लगातार चल रहा है ।बीहार गाँव निवासी गुरदासपुर टोला के सुरेंद्र सिंह उर्फ शुरो सिह कहते हैं कि यहां पर मां दुर्गा की पूजा हजारों वर्षों से चलते हुए आ रहा हैं। पहले यहां खड़ पत का मंदिर बना था। उसके बाद मिट्टी का मंदिर बना। 1959 में जब गंगा के पानी का बाढ़ यहाँ पर आया तो उसमें मिट्टी का बना मंदिर पानी में गिर गया। उसके बाद इस गांव के स्वर्गीय भुवनेश्वर सिंह और स्वर्गीय राम प्रताप सिंह की पत्नी स्वर्गीय सावित्री देवी ने मिलकर दुर्गा मंदिर का निर्माण ईटा का कराया। उसके बाद पूरे बीहार गाँव व अन्य गांव के लोगों के जन सहयोग से माता दुर्गा के भव्य मंदिर के नव निर्माण का कार्य फिलहाल अभी भी चल रहा है। इस मंदिर के प्रधान पुजारी बीहार गांव के पंकज कुमार सिंह उर्फ फलाहारी बाबा कहते हैं कि जब से इस मंदिर का नव निर्माण का कार्य शुरू हुआ ,तब से मैं मां भगवती की सेवा लगातार पिछले 12 वर्षों से करते हुए आ रहा हूं। फलाहारी बाबा दोनों शाम फल खाकर ही रहते हैं ।कभी अपने पैर में चप्पल भी नहीं पहनते हैं। एक बार की आँखों देखाहाल घटना है कि मंदिर प्रांगण में एक विषधर गेहुंमन सांप कहीं से आ गया था ।सभी ग्रामीण लोग मिलकर उस साँप को मारना चाह रहे थे ।लेकिन उस सांप को बचाने के लिए फलाहारी बाबा ने ग्रामीणों से अनुरोध किया कि कोई सांप को नहीं मारे। मैं इसे अपने हाथों से पकड़ कर कहीं दूसरे जगह पर जाकर इसे छोड़ देता हूं। इसी क्रम में फलाहारी बाबा उस विषधर साँप के मुँह को अपने दाहिने हाथ से पकड़े । उस विषधर साँप ने उन्हें डस लिया। सांप के डसने के बाद वह दुर्गा माता जी के मंदिर के स्थान में आए और भगवती के चरणों में गिर गए और कहा या तो मां मुझे मार के ले चलो या तो मुझे बचा लो। गांव के सभी लोग समझ गए कि अब फलाहारी बाबा को मरने से कोई बचा नहीं सकता है। लेकिन दुर्गा माता की देखिये उनकी असीम कृपा उनको बाल बांका तक भी नहीं हुआ ।अंत में फलाहारी बाबा को सभी लोगों ने मिलकर सुशील नगर स्थित एलेक्सिया हॉस्पिटल में भर्ती कराया ।जहां डॉ शशिभूषण सिह के द्वारा फलाहारी बाबा के शरीर का जब जांच किया गया ,तो उनके शरीर में साँप का विष नहीं था ।अंत में डॉक्टर ने एक टीटभेक की सुई लगाकर उन्हें घर जाने के लिए कहा ।यह है साक्षात यहाँ के मंदिर की कृपा ।इस स्थान म़े ऐसे सैकड़ों लोग मंदिर में दरबार लगाने के लिए सालों भर आते रहते हैं ।जिन्हें पुत्र रत्न धन की प्राप्ति, सरकारी नौकरी के अलावे शरीर में कोई अन्य रोगों से निजात पाने के लिए भी पूजा-अर्चना मंदिर के प्रांगण में करने आते हैं ।जहां उनकी सारी मनोकामनाएं मां दुर्गा की कृपा से पूरा होती है ।इस मंदिर के प्रांगण में मां दुर्गा का पट निशा पूजा होने के बाद मध्य रात्रि बाद आम श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए पट खोल दिया जाता है।विजयादशमी के दिन दिल के 3:00 से 4:00 बजे अपराहन में मां की प्रतिमा को विसर्जन के लिए मंदिर से उठा लिया जाता है। मां दुर्गा के विसर्जन करने में पूरे गांव के बूढ़े, बच्चे ,जवान तथा महिलाएं शामिल होती हैं ।विजयादशमी के मध्य रात्रि बाद पूरे गांव घुमाते हुए सिमरिया धाम के गंगा तट पर मां दुर्गे के प्रतिमा का विसर्जन कर दिया जाता है ।फलाहारी बाबा पंकज कुमार बेगूसराय जिला वासियों से एक बार अनुरोध करते हैं कि अवश्य बीहट स्थित सिद्धपीठ मां दुर्गा स्थान में दर्शन करने के लिए विजयादशमी के अंदर जरूर भक्त श्रद्धालु गण यहां पहुंचे ,यहां मां की असीम कृपा विराजमान है।






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