गोपालगंज में एक दलित की प्रताडना के बाद भी कंप्रोमाइज की कहानी अजात शत्रु की जुबानी

Ajat Shatru

मैं और मेरे दो अजीज साथी गोपालगंज भीम आर्मी के संस्थापक सदस्य रंजय अम्बेडकर और मनोज रंजन पहुंचे इस दलित के घर जिनको कुछ सामंतियों ने मार मार कर लहू लुहान कर दिया था और उनके दोनों पैर तोड़ने का पूरा प्रयास किया था, कसूर बस इतना कि सामंतियों के खेत के किनारे डरेर को रास्ता समझकर जा रहे थे…..
सामंतियों के खिलाफ FIR दर्ज कराने के लिए आवेदन लिखकर SC-ST थाने में गया तब दरोगा ने कहा कि जांच के बाद FIR दर्ज होगा, मैन दरोगा जी से पूछा, ये इंज्यूरी, डॉक्टर की रिपोर्ट सामने है, गवाह सामने है और क्या जांच कीजियेगा……???? दरोगा जी ने बड़े प्यार से मुझसे कहा कि थोड़ा घटना स्थल का निरीक्षण कर लेने दीजिये, और मैं जरूर FIR दर्ज करूँगा और गिरफ्तारी भी करूँगा….. हमने पूछा कब करेंगे तो अगले दिन का हवाला देकर मुझसे एक दिन का वक्त मांगा…..
मैन भी उनसे कह दिया कल मिलते है और कल कोई बहाना नही चलेगा…. दरोगा जी ने मुस्कुराते हुए विदा किया…..
अगले दिन ना थाने से कोई खबर आयी और ना ही पीड़ित परिवार ने मुझसे संपर्क किया….. मुझे चिंता हुआ तो मैं पीड़ित के घर पहुंचा तब जाकर पता चला कि दरोगा जी अगले दिन सामंतियों के घर जाकर मामले की गंभीरता से उन लोगों को अवगत कराएं और बताये की इस मामले की पैरवी अजात शत्रु कर रहा है….
उसी दिन दबंगो ने अपनी दबंगई अपने घर रखकर पीड़ित के घर पहुंचे और उनसे कहने लगे कि यह हमारे आपस की लड़ाई है इसमें अजात शत्रु को बीच मे लाने की कोई जरूरत नही है, हम जानते है कि वो अच्छा आदमी नही है, वो हर मामले को खराब कर देता है और राजनीति करता है और उसी से पैसा कमाता है…..
पीड़ित ने बताया कि वे लोग काफी निहोरा कर रहे थे मामले को आगे मत बढाइये और मेरे इलाज का पैसा दिये है, और हमलोग गरीब आदमी है कोर्ट कचहरी के चक्कर मे रोजी रोटी का नुकसान होगा वो अलग….. और अगला अपनी गलती मान रहा है, इलाज का खर्चा उठा रहा है तो हमलोग भी कोम्प्रोमाईज़ करके मामले को खत्म कर दिये……
मेरी प्रतिक्रिया:- ना जाने कब हमारे लोग नींद से जागेंगे और अपने मान-सम्मान के लिए संघर्ष करेंगे, यह सिर्फ एक दलित का सवाल नही है बल्कि यह मनुवादी मानसिकता को ध्वस्त करने के लिए संघर्ष करना है….. मैं तो इनकी नजरों में गलत हूँ, पैसा कमाता हूँ, राजनीति करता हूँ, लोगों को फसाता हूँ, लोगों को लड़वाता हूँ……
यदि किसी के मान सम्मान, न्याय, अधिकार के लिए संघर्ष करना राजनीति करना है तो मैं फक्र से कहता हूं, “हाँ करता हूँ मैं राजनीति” और आखरी सास तक करूँगा…
मैं अपने दोनों साथियों Ranjay Paswan Ambedkar और Manoj Ranjan को तहे दिल से धन्यवाद देता हूँ जिनका साथ मेरे हर संघर्ष को मजबूत बनाता है…..
……जय भीम, लाल सलाम……
नीले आसमान में लाल निशान,
मांग रहा है हिंदुस्तान………

(गोपालगंज के Ajat Shatru के फेसबुक टाइम लाइन से ज्यों का त्यों बिहार कथा के पाठकों के लिए साभार )






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