गोपालगंज : इंजीनियरिंग कॉलेज खोलने के नाम पर राजनीतिक

इंजीनियरिंग कॉलेज खोलने के नाम पर एनडीए में संग्राम । कॉलेज बनने के पहले राजनीतिक दंगल के मैदान में राजग नेता आपस में ही कर रहे दो-दो हाथ । एक-दुसरे को पटखनी देने के लिए सभी चल रहे दांव-पेंच । जनता के बीच जाने से लेकर न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की हो रही बात ।

Vijay Tiwari
गोपालगंज को सरकार ने इंजीनियरिंग कॉलेज क्या दिया ? एनडीए के नेताओं को आपस में लड़ने के लिए राजनीतिक दंगल का मैदान ही दे दिया । गोपालगंज के खाते में यह हक मिला जरुर । पर यह हक कई विवादों को लेकर आया है । एक तरफ कुचायकोट विधानसभा क्षेत्र के अन्तर्गत सिपाया कृषि फार्म जहां पुर्व से राजकीय पॉलीटेक्निक कॉलेज चल रहा है । वहीं सैनिक स्कूल का भवन भी बनकर तैयार है और शैक्षणिक कार्य प्रारंभ होने ही वाला है । जबकि तत्कालीन सांसद स्व० रघुनाथ झा के प्रयास से कृषि अनुसंधान केन्द्र पुर्व में ही प्राप्त हो चुका है। आईटीआई कॉलेज भी खोले जाने की बात है । अब इंजीनियरिंग कॉलेज खोले जाने से यहां शिक्षा हब बनने की प्रबल संभावना साकार होने जैसा लगने लगा है । लेकिन शिक्षा हब बनने के पुर्व ही राजनीतिक कुश्ती शुरू हो गई है । कुश्ती भी किसी विपक्षी दल के नेताओं के बीच नहीं । बल्कि राजग एवं एक ही दल के नेताओं के बीच हो रहा है । अब सवाल यह हो रहा है कि यह नूरा कुश्ती है या सचमुच अपने-अपने क्षेत्र के पहले विकास की लड़ाई । विधान पार्षद आदित्य नारायण पाण्डेय जो कुचायकोट क्षेत्र के निवासी भी है, हर हाल में सिपाया में ही इंजीनियरिंग कॉलेज खुलवाना चाहते हैं । पाण्डेय के मुताबिक बैकुंठपुर नक्सल प्रभावित इलाका है । वहां इंजीनियरिंग कॉलेज खोलना ठीक नहीं रहेगा । उनका दावा है कि यहां कॉलेज बना तो जिला की अधिकांश आबादी को सिधा लाभ मिलेगा । तो वहीं बैकुंठपुर के पुर्व विधायक तथा जदयू के पुर्व जिलाध्यक्ष मंजीत सिंह इस कॉलेज को हर सूरत में बैकुंठपुर में ले जाने की वकालत कर रहे हैं । श्री सिंह का कहना है कि सिपाया में उनके विरोध के कई प्रमुख कारण है । वह स्थान बाढ़ प्रभावित है । जिसके कारण बाढ़ के दिनों में पुर्व से चल रहे पॉलिटेक्निक कॉलेज में दो-दो महिने तक पढ़ाई बाधित रहती है । वहीं कृषि सचिव द्वारा स्पष्ट निर्देश है कि कृषि फार्म की जमीन पर कोई अन्य संस्थान नहीं खोले जाए । सिंह के मुताबिक सिपाया में सिर्फ 7 एकड़ जमीन मिल रहा जबकि एन एच 28 के किनारे 11 एकड़ जमीन दिया जा रहा है । वहीं कुचायकोट से जदयू विधायक अमरेन्द्र कुमार पाण्डेय उर्फ पप्पू पाण्डेय का दावा है कि यह कॉलेज उनके निजी प्रयासों से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गोपालगंज के कुचायकोट के सिपाया में दिया है तथा इस स्थल पर कोई विवाद नहीं है । क्योंकि जिला प्रशासन ने सिपाया को सबसे बेहतर स्थान बताते हुए अपना रिपोर्ट भी दिया है । उधर हम के जिलाध्यक्ष पंकज सिंह राणा भी इस संग्राम में कूद गए हैं । राणा के अनुसार एक नेता सिपाया को बाढ़ प्रभावित तो दूसरे नेता बैकुंठपुर को नक्सल प्रभावित बता रहे हैं । राणा का कहना है कि जिला मुख्यालय से बेहतर कोई विकल्प नहीं , जहां जिला के कोने-कोने के लोगों को फायदा होगा ।गौरतलब हो कि कॉलेज स्थापना के लिए स्थल चयन हेतु संबंधित विभाग की पटना से टीम आकर निरीक्षण कर चुकी है । जिला प्रशासन ने भी सिपाया को उपयुक्त स्थल बताते हुए रिपोर्ट किया है । वहीं जिलावासियों को यह भय सताने लगा है कि यह कॉलेज कहीं राजनीतिक विवादों में उलझकर न रह जाए । क्योंकि जिला के उक्त राजनीतिक दिग्गज इसे अपने नाक की प्रतिष्ठा समझने लगे हैं तथा इसके लिए जनता के बीच जाने से लेकर न्यायालय का दरवाजा खटखटाने तक की बात कह रहे । सिपाया में तो आज सैकड़ों की तादाद में लोगों द्वारा अनशन करने की खबर भी है ।






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