मर जाएम तब सरकार दी हमार पेंशन के पइसा!

सैनिक की विधवा 8 वर्ष से अपने बकाए पेंशन की बाट जोह रही है।

गृह मंत्रालय एवं रक्षा मंत्रालय के हस्तक्षेप के बाद भी एसबीआई बैंक के अधिकारी सोये हुए हैं।

ट्वीटर पर एसबीआई, रक्षा मंत्री, गृहमंत्री सहित सभी अधिकारियों को इस बावत शिकायत की जा चुकी है।

बिहार के सीवान जिला के रजनपुरा गांव की रहने वाली विधवा जासमति देवी अपने एरियर के लिए लगा रही हैं बैंक का चक्कर

6 वर्ष चक्कर लगाने के बाद शुरू हुआ था पेंशन, अब एरियर के लिए भटक रही हैं।

दोषी बैंककर्मियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग

सीवान. ( Bihar Katha )देश की रक्षा करने में जो जवान अपनी ज़िंदगी को कुर्बान कर देते हैं, अगर उनके परिवार को सरकार सहारा न दे पाए तो इससे बड़ा अपमान और क्या हो सकता है! असम राइफल्स से सेवानिवृत्त स्व.वैद्यनाथ सिंह की पत्नी जासमति देवी 6 साल तक अपना फैमिली पेंशन पाने के लिए जूझती रहीं और अब अपना एरियर का पैसा पाने के लिए जूझ रही हैं।

1जनवरी 2010 से लेकर 31दिसंबर 2015 तक का फैमिली पेंशन एरियर बकाया है। इस बावत सैनिक की विधवा जासमति देवी का कहना हैं कि, मेरे पति देश की सेवा में पूरी जिंदगी कुर्बान कर दिए, लेकिन सरकार ने उनके परिवार के साथ बहुत बुरा किया है। अपने गुस्से का इजहार करते हुए वो आगे कहती हैं कि, जियत भर में आपन मरद के कमाई के पइसा हमारा ना मिली त हम मर जाएम तब पइसा मिलिए के का होइ!

इस बावत जासमति देवी के पुत्र आशुतोष कुमार सिंह ने बताया कि, जब एसबीआई गोपालपुर, पटना पेंशन ऑफिस एरियर जारी करने में लेटलतीफी करने लगा तो इसकी शिकायत गृह मंत्री, एवं असम राइफल्स के शिलॉंग स्थित मुख्यालय को किया गया। गृह मंत्रालय के संज्ञान में आने के बाद अक्टूबर 2017 में असम राइफलस के एकाउंट विभाग ने सेंट्रल पेंशन ऑफिस को निर्देश दिया कि जासमति देवी का फैमिली पेंशन का बकाया यथाशीघ्र निर्गत किया जाए। लेकिन इस निर्देश को एसबीआई के अधिकारियों ने कूड़े में डाल दिया और मामले को लटकाए रखा।

एसबीआई पेंशन ऑफिस पटना के ढुलमुल रवैये से नाराज होकर इसकी शिकायत ट्विटर के माध्यम से एसबीआई मुख्यालय, रक्षा मंत्री , गृहमंत्री एवं पीएम ऑफिस को पुनः किया गया। एसबीआई ने मामले को संज्ञान में लिया और पटना को जल्द इस दिशा में काम करने का निर्देश दिया। इस बीच असम राइफल्स निदेशालय की ओर से एसबीआई, पटना को  20 अप्रैल, 2018 को एक और पत्र भेजा गया, जिसमें एरियर का पैसा देने का निर्देश है।

श्री आशुतोष ने आश्चर्य जताते हुए कहा कि, जब सारा पेपर ठीक है, असम राइफल्स की ओर से बार-बार पैसा निर्गत करने के लिए कहा जा रहा है। इसके बावजूद एसबीआई, पेंशन ऑफिस, पटना द्वारा इस तरह का गैर-जिम्मेदार रवैया अपनाया जाना दुखद है। एक सेनानी की आत्मा को कष्ट पहुँचाने वाला है। ऐसे में दोषी अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई जरूर होनी चाहिए।






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