हथुआ की डालडा फैक्ट्री : जहां कई राज्यों के लोग करते थे काम, अब बचा है केवल फैक्ट्री का गेट

4 वर्ष में ही हथुवा के नटवर ब्रांड ने बनायी थी बाजार में पहचान, अब कुछ नहीं बचा

सुनिल कुमार मिश्र, हथुआ, गोपालगंज।
गोपालगंज जिले के हथुआ को राष्ट्रीय मानचित्र पर औद्योगिक पहचान दिलाने वाले हथुआ वनस्पति फैक्ट्री के बंद होने से औद्योगिक इकाई के रूप में हथुआ की पहचान समाप्त हो गई. हथुआ-मीरगंज मुख्य मार्ग पर वर्ष 1983 में 27  एकड़ क्षेत्र में स्थापित हथुआ वनस्पति प्राइवेट लिमिटेड के उत्पाद नटवर ब्रांड वनस्पति ने काफी काम समय  में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना ली थी। इस ब्रांड की गुणात्मक रूप से बाजार में एक अलग ही मान्यता थी। मार्केट में इसकी काफी विश्वसनीयता थी। लेकिन 1987 में इस फैक्ट्री के बंद होने से हथुआ के विकास पर ग्रहण लग गया। नतीजा यह हुआ कि फैक्ट्री में काम करने वाले हजारों मजदूर बेरोजगार हो गए। हथुआ सहित आस-पास के बाजारों पर भी इसका व्यापारिक असर पड़ा। मात्र चार वर्ष में ही मार्केट में सफलता के नए आयाम गढ़ने वाले इस फैक्ट्री में वर्तमान में ताला बंदी है।
कई राज्यों से आए कर्मचारी हथुआ में करते थे काम
वनस्पति फैक्ट्री के कारण कभी सूबे में हथुआ भारत का दिग्दर्शन कराता था। इसका कारण यह था कि बड़ी संख्या में तकनीकी व अन्य कर्मी देश के कोने-कोने से आकर इस फैक्ट्री में काम करते थे। विभिन्न जाति,धर्म,संप्रदाय व प्रांत के लोग फैक्ट्री के वर्कर थे,या फिर व्यवसाय के सिलसिले में हथुआ आते-जाते रहते थे। मुख्य पथ पर स्थित अपने भव्य कैंपस,साज-सज्जा व दूधिया रौशनी से रौशन यह फैक्ट्री आने-जाने वाले लोगों को किसी बड़े शहर के भव्य औद्योगिक क्षेत्र का आभास दिलाती थी। लेकिन अब सब कुछ खत्म हो गया और ये सारी बातें अब गुजरे जमाने की याद हो गयी।

फ़ाइल फ़ोटो

अब ऐसा दिखता है नजारा
वर्तमान में फैक्ट्री के मुख्य गेट पर ताला बंद है। वहीं कैंपस व गेट पर बड़ी-बड़ी झाड़ियां व जंगल उग आए हैं। इसके कारण उस तरफ लोगों की आवाजाही भी कम होती है। फैक्ट्री के कल-पुर्जे चोरों का शिकार बने,तो शेष बचे बाकि संपत्तियों को हाई कोर्ट द्वारा निलाम कर दिया गया। फैक्ट्री के नाम पर विभिन्न बैंकों से ली गयी लोन को चुकता नहीं करने पर फैक्ट्री के सभी संपत्तियों को हाई कोर्ट ने निलाम करने का आदेश दिया था। फैक्ट्री को पुन: चालू करने की मांग लंबे समय से उठती रही है। लेकिन अब ऐसा संभव नहीं है। यहां अब कुछ नहीं बचा है. वर्तमान में फैक्ट्री के जीएम आवास में ही रक्षा मंत्रालय द्वारा सैनिक स्कूल संचालित होता है। फैक्ट्री के अस्त्वि के नाम पर हथुआ बनस्पति लिमिटेड का गेट भर बचा हुआ है.






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