August, 2017

 

इस बार बिग बॉस में दिख सकती है ‘भोजपुरी फिल्मों की रानी’

मुंबई .कलर्स का चर्चित रियलिटी शो हमेशा सुर्खियों में रहता हैं, इस बार पड़ोसी की थीम पर आ रहे इस शो के कंटेस्टेंट को लेकर रोज नए नाम सामने आ रहे हैं। अब खबर यह आ रही हैं, की इस बार भोजपूरी एक्ट्रेस रानी चटर्जी को अप्रोच किया गया हैं, जी हाँ रानी चटर्जी भोजपुरी फिल्मों के अलावा हिन्दी फिल्मों में भी काम कर चुकी हैं। उन्होंने बताया कि सलमान से उनकी पहली मुलाकात सेलेब्रिटी क्रिकेट लीग के दौरान हुई थी। तब सलमान ने उन्हें देखकर कहा था कि ‘इन्हेंRead More


बिहार की 70 प्रतिशत आबादी की पहुंच अब भी शौचालय तक नहीं- सीएसई

शौचालय की सुविधा नहीं होने के कारण 50 फीसदी लड़कियां नहीं जाती हैं स्कूल पटना. केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार एक तरफ जहां वर्ष 2019 तक देश को खुले में शौच मुक्त करने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रही है, वहीं इसके विपरीत बिहार की 70 प्रतिशत आबादी की पहुंच अब भी शौचालय तक नहीं है। दिल्ली आधारित अनुसंधान और पक्षसमर्थक संस्था सेंटर फॉर साइंस एंड इनवायरमेंट (सीएसई)के नए अध्यययन में यह खुलासा हुआ है कि देश में बिना शौचालय के 6.4 करोड़ परिवारों में से 22 प्रतिशत अकेलेRead More


झूठ का घेरा सच्चा डेरा

राम रहीम को लगता था कि वह अपने रसूख और राजनीतिक ताकत की बदौलत अपने आप को बचा ले जाएंगे लेकिन ऐसा हो नहीं पाया। उनकी कोई राजनीतिक जुगलबंदी उनके काम न आई और आखिरकार अदालत ने उनके कुकर्मों की सजा सुना दी। अगले बीस साल उनको जेल कोठरी में ही बिताने हैं और अपने कर्मों का हिसाब करना है। क्योंकि उन्होंने डेरा जैसी धार्मिक सामाजिक व्यवस्था को विकृत किया और उसे अपराध और अय्याशी का अड्डा बना दिया। संजय तिवारी, नई दिल्ली. 1948  में जब शाह मस्ताना बलोचिस्तानी सिरसाRead More


कांग्रेस-लालू युक्त विपक्षी एकता के सशक्त मंच की उम्मीद कहां है?

विष्णुगुप्त (वरिष्ठ पत्रकार) प्रश्न यह नहीं कि पटना में लालू की बहुचर्चित रैली सफल थी या असफल थी? प्रश्न यह है कि उस बहुचर्चित रैली का राजनीतिक संदेश क्या था? क्या यह रैली नरेन्द्र मोदी विरोधी एक सशक्त राजनीतिक मंच तैयार करने में कामयाब हुई है?लालू की रैली का संदेश देश में मोदी के खिलाफ एक सशक्त मंच तैयार करना और 2019 के लोकसभा चुनावों में मोदी को हराना है। रैली में कांग्रेस, कम्युनिस्ट सहित ममता बनर्जी और अखिलेश यादव की उपस्थिति जरूर रही है पर मायावती की अनुपस्थिति यहRead More


अधूरी आजादी भारत की

सरकार बुनियादी परिवर्तन नहीं कर पाती। परिवर्तन के लिए जनता को संविधान के बाहर संघर्ष करना पड़ता है। विज्ञान के इस युग में संगठित राज्य-शक्ति और लोकशक्ति को मिलकर पुननिर्माण करना होगा। इन दोनों का सम्मानपूर्ण सहयोग परिवर्तन तथा पुननिर्माण की क्रांति का मध्यस बिन्दुू है। लोक समाजवादी लोकतांत्रिक व्यरवस्था  में क्रांति स्वकयं पुननिर्माण का एक अंग बन जाती है। लोकतंत्र में उत्तथरदायी सरकार का निर्माण क्रांतिकारी संघर्ष का अनिवार्य अंग है। उत्तवरदायी सरकार के गठन में लोकशक्ति का संगठन असली आजादी प्राप्त करने का माध्य म बनेगा। यही असलीRead More


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