सीवान : पचरुखी में चीनी मिल की जमीन विवाद फिर गरमाया, जमीन नापी पर तू-तू-मैं-मैं, ग्रामीणों का आरोप-जमीन माफियाओं से मिला है प्रशासन

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बिहार कथा. सीवान : वर्षो से बंद पड़े पचरुखी के  एकमात्र चीनी मिल की जमीन का विवाद एक बार गरमा गया है । एक  ओर  आस पास के ग्रामीण किसान हैं तो दूसरी तरफ भू सरगना  हैं, जिन लोगो द्वारा हर स्थिति में प्रशासन की मिलीभगत से जमीन को कब्जाना चाहते हैं। इलाके के ग्रामीणों के आशंका को जायज माना जाए तो इसके लिए प्रशासन व भू सरगनाओं का आंतरिक साठ गाठ प्रबल उदाहरण है जिसे ग्रामीण लगातार देख रहे है।  इसका परिणाम बुधवार को देखने को तब मिला , जब प्रशासन भू-सरगनाओं के प्रभाव में आकर जबरन भूमि की पैमाइश कराने लगा। इससे गुस्साए लोगों ने बड़हरिया विधान सभा के पूर्व प्रत्याशी उमेश कुमार के नेतृत्व में सैकड़ो की संख्या में आकर मापी को रोक दिया। इस दौरान धक्का -मुक्की और तू-तू ,मैं-मैं हो गई। हालांकि आक्रोशित लोगों के गुस्सा को देख प्रशासन को नरम होना पड़ा । मापी की सूचना मिलते ही काफी संख्या में महिला, पुरुष बालक व वृद्ध भी मौके पर पहुंच गए तथा मापी का जमकर विरोद्ध किया। इस दौरान काफी समय तक हल्ला हंगामा होते रहा कई-कई बार तो अफरा-तफरी की स्थिति उत्पन्न हो गई। मापी की सूचना पर स्थानीय विधायक श्यामबहादुर सिंह भी मिल परागण में पहुचे व मापी का खुलकर विरोध किया। जदयू विधायक श्यामबहादुर सिंह के प्रति भी लोगों का आक्रोश सातवे आसमान पे था। लोगों का आरोप था कि विधायक भू-सरगनाओं के लालच में आकर किसान विरोधी कार्य कर रहें हैं। कभी भी मुखर होकर किसानों की आवाज को विधानसभा में नहीं उठाया है। हालांकि जब विधायक जी को पैमाइश का विरोध करते लोगों ने देखा तो उनकी नाराजगी काफी हद तक दूर हो गई। लोगों ने विधायक श्यामबहादुर सिंह से कहा कि आप इस मामले को विधान सभा में उठाइये। इन सब में पचरूखी सीओ की भूमिका संदेहास्पद है। आक्रोशित किसानो का कहना है कि आखिर क्या कारण है कि गैर-मजरुआ जमीन की भी खरीद-बिक्री हो रही है? किसानों की कीमती जमीन पर बनें चीनी मिल की जमीन को औने-पौने दाम पर निलाम करा दिया गया और सही प्रतिवेदन नहीं दिया गया? Displaying WhatsApp Image 2017-06-07 at 5.18.28 PM.jpeg
उच्च न्यायालय में लंबित है मामला- उमेश
बड़हरिया विधानसभा सभा के पूर्व प्रत्याशी उमेश कुमार सिंह ने यह आरोप लगाया है कि पचरूखी के चीनी मिल की जमीन में न केवल भू-सरगनाओं  बल्कि इनकी मिलीभगत से अधिकारी व  कई अन्य भी मालामाल हुए हैं और बेनामी संपत्ति बनाई है।जिसके बारे में सूचना भी मांगी गयी है।परंतु सूचना उपलब्ध नहीं कराई गयी है।यही नहीं इस जमीन के बारे में हाईकोर्ट में मैंने जनहित याचिका उहखउ ठङ्म 1565/17 भी दायर किया है।जिस पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा है। बड़हरिया विधान सभा के पूर्व प्रत्याशी उमेश कुमार का कहना है कि मिल की जमीन की नीलामी पूर्णत: गलत है।श्री कुमार बताते हैं कि उक्त भूमि का भू-अर्जन बिहार सरकार द्वारा सार्वजनिक हित में वर्ष 1950 ईङ्म में किया गया।चीनी मिल को उक्त जमीन किसानों ने इस शर्त के साथ दिया था कि सरकार जब चाहे कम्पनी को समाहर्ता द्वारा निर्धारित मुवावजे का भुगतान कर जमीन वापस ले सकती है।यदि कम्पनी को भूमि की आवश्यकता नहीं होगी तो कम्पनी मुआबजे में दी गई राशि को वापस लेकर उक्त जमीन मूल भू-धारियों को सौंप देगी।इस प्रकार उक्त भूमि पर कंपनी का अधिकार केवल चीनी मिल चलाने तक ही सिमित था।मिल बंद होने की स्थिति में उक्त जमीन या तो सरकार के कब्जे में चली जानी थी अथवा मूल भू धारियों को लौटा दी जानी थी।लेकिन इन सभी बातों को नजरअंदाज करते हुवे कम्पनी ने उक्त भूमि को बैंक के पास बंधक रखकर लोन ले लिया तथा लोन चुकाने में असफल होने पर बैंक द्वारा जमीन की नीलामी कराई गई।अब उक्त भूमि निजी हाथों में जा रही है ,जो बिहार सरकार एवं पचरुखी व जसौली के किसानों के साथ धोखाधड़ी है।






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