बिहार में 14 हजार शिक्षकों की बहाली जल्द
पटना। शिक्षा विभाग ने राज्य के सरकारी माध्यमिक व उच्च माध्यमिक स्कूलों में 14 हजार रिक्त पदों पर शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया तेज कर दी है। गुरुवार को शिक्षा विभाग के आदेश पर सभी जिला कार्यक्रम पदाधिकारियों (स्थापना) ने अपने-अपने जिलों में हाईस्कूल व प्लस टू शिक्षकों के रिक्त पदों का ब्यौरा सौंप दिया है। मिली जानकारी के मुताबिक अगले एक सप्ताह में माध्यमिक शिक्षा निदेशालय डीपीओ से प्राप्त ब्यौरे को संकलित कर विषयवार रिक्तियां निकाल लेगा। इसके बाद रिक्तियों के अनुरूप योग्य शिक्षकों के चयन की प्रक्रिया शुरू होगी।
बीएसईबी को दिया जा चुका है तैयारी का निर्देश
शिक्षा विभाग ने बिहार विद्यालय परीक्षा समिति को हाईस्कूल व प्लसटू के रिक्त 14 हजार पदों पर नियुक्ति के लिए विशेष माध्यमिक व उच्च माध्यमिक शिक्षक पात्रता परीक्षा अयोजित की तैयारी करने का आदेश दिसम्बर में ही दे दिया था। बिहार बोर्ड इसकी तैयारी कर रहा है। माध्यमिक शिक्षा निदेशालय द्वारा विषयवार रिक्ति इकळा कर लेने के साथ ही जरूरत के विषयों में एसटीईटी का शिड्यूल जारी कर दिया जाएगा।
एसटीईट में शामिल होने को प्रशिक्षित होना अनिवार्य
अनट्रेंड अभ्यर्थी एसटीईटी में शामिल नहीं हो सकेंगे। नेशनल काउंसिल आॅफ टीचर एजुकेशन के निदेर्शों के मुताबिक अब राज्य में आयोजित होने वाली किसी भी टीईटी अथवा एसटीईटी में केवल प्रशिक्षित शिक्षक ही बैठ सकते हैं। बीएड या एमएड की डिग्री के साथ ही स्नातक और स्नातकोत्तर उतीर्ण अभ्यर्थी आवेदन कर सकेंगे।
12 हजार शिक्षकों की हुई थी बीते वर्ष नियुक्ति
मौजूदा वित्तीय वर्ष में शिक्षा विभाग ने माध्यमिक व उच्च माध्यमिक कक्षाओं में क्रमश: 9000 और 17 हजार 583 पदों पर शिक्षकों के नियोजन का शिड्यूल जारी किया था। लेकिन माध्यमिक में 7254 और प्लसटू में 5391 शिक्षक ही नियोजन इकाइयों द्वारा नियोजित किए जा सके। गणित, विज्ञान, अंग्रेजी, सामाजिक विज्ञान आदि विषयों में एसटीईटी उत्तीर्ण ट्रेंड शिक्षक नहीं मिले। इसी के मद्देनजर विशेष टीईटी लेने का निर्णय पिछले ही माह किया गया।
उर्दू-बांगला की नियुक्ति की भी हो रही समीक्षा
गुरुवार को शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव डा. धर्मेन्द्र सिंह गंगवार की अध्यक्षता में हुई डीपीओ (स्थापना) की राज्यस्तरीय बैठक में सभी जिलों ने उर्दू और बांगला शिक्षकों की नियुक्ति का भी विवरण सौंपा है। इसे समेकित करने के बाद विभाग को पता चलेगा कि इन विषयों में कितने शिक्षक नियुक्त हुए और कितने पद रिक्त रह गए। रिक्त पदों पर विभाग नियोजन का पुन: विचार कर सकता है।
सख्ती से होगा स्कूलों का निरीक्षण
शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव डा. डीएस गंगवार ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि स्कूलों की निरीक्षण प्रणाली को प्रभावी बनाएं। गुणवत्ता शिक्षा पर सरकार का अब मुख्य फोकस है और प्रभावी निरीक्षण इसमें सबसे सहायक बनेगा। निरीक्षण का फोकस बच्चों की उपस्थिति, शिक्षण का स्तर और विद्यालय के माहौल को चेक करना हो। शिक्षा विभाग की हर बैठक में अब डीपीओ को जिले के स्कूलों की मासिक स्कूल इन्सपेक्शन रिपोर्ट भी लानी होगी और इसकी समीक्षा भी होगी। -लाइव हिंदुस्तान से
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